अमेरिका की ओर से बातचीत के लिए डेलिगेशन के पाकिस्तान जाने को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। सोमवार को खबरें आई थीं कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल जल्द इस्लामाबाद पहुंच सकता है, लेकिन बाद में ये खबरें गलत साबित हुईं। सीजफायर की समयसीमा खत्म होने से पहले अगर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो एक बार फिर संघर्ष शुरू होने की आशंका है। फिलहाल यह भी तय नहीं है कि इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच कोई बैठक होगी या नहीं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, जेडी वेंस मंगलवार को पाकिस्तान के लिए रवाना हो सकते हैं। वहीं Bloomberg से बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि सीजफायर अमेरिकी समयानुसार बुधवार रात 8 बजे तक लागू रहेगा। इस हिसाब से दोनों देशों के पास गुरुवार सुबह तक निर्णय लेने का समय होगा।
दूसरी ओर, ईरान ने साफ किया है कि उसकी कोई भी आधिकारिक या अनौपचारिक टीम बातचीत के लिए पाकिस्तान नहीं गई है। सरकारी मीडिया के अनुसार, इस तरह की सभी खबरें गलत हैं। ईरान का कहना है कि वह धमकियों के माहौल में बातचीत नहीं करेगा और जब तक अमेरिका अपना रुख नहीं बदलता, तब तक वार्ता आगे नहीं बढ़ेगी।
बातचीत में अड़चन क्यों?
ईरान के बातचीत से पीछे हटने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। The New York Times की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की आक्रामक और दबाव वाली रणनीति ने हालात को जटिल बना दिया है। ट्रंप अक्सर सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर बड़े दावे करते हैं, जिनका ईरान खंडन कर देता है।
ईरान के बातचीत से पीछे हटने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। The New York Times की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की आक्रामक और दबाव वाली रणनीति ने हालात को जटिल बना दिया है। ट्रंप अक्सर सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर बड़े दावे करते हैं, जिनका ईरान खंडन कर देता है।
ट्रंप जहां तेजी से समझौता करना चाहते हैं, वहीं ईरान धैर्य के साथ लंबी रणनीति अपनाए हुए है। ट्रंप का दावा है कि वह ईरान के साथ बराक ओबामा से बेहतर परमाणु समझौता करेंगे, लेकिन ईरान का कहना है कि अमेरिका भरोसेमंद नहीं है, क्योंकि एक सरकार समझौता करती है और दूसरी उसे तोड़ देती है।
ईरान की चेतावनी
ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गलिबाफ ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि युद्ध फिर से शुरू होता है, तो ईरान नए तरीकों से जवाब देगा। उन्होंने संकेत दिया कि युद्धविराम के दौरान ईरान ने अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत किया है, जिसमें मिसाइल और ड्रोन क्षमता भी शामिल है। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी तरह के दबाव या थोपे गए शर्तों को स्वीकार नहीं करेगा। अब नजर इस बात पर है कि सीजफायर खत्म होने के बाद हालात टकराव की ओर बढ़ते हैं या कूटनीति से कोई रास्ता निकलता है।
