शहर के प्रमुख मंदिरों में अब देवी देवताओं को गर्म और भारी वस्त्रों की जगह हल्के और सूती कपड़े पहनाए जा रहे हैं जिससे उन्हें ठंडक मिल सके वहीं श्रृंगार में भी बदलाव करते हुए चंदन खस मोगरा और गुलाब जैसे प्राकृतिक ठंडक देने वाले तत्वों का उपयोग बढ़ा दिया गया है मंदिरों में फैलती इन सुगंधों के साथ वातावरण भी शीतल और शांत महसूस होने लगा है
भोग की परंपरा में भी मौसम का असर साफ दिख रहा है जहां पहले पक्के और गरम भोजन चढ़ाए जाते थे वहीं अब उनकी जगह ठंडे और तरल पदार्थों को प्राथमिकता दी जा रही है भगवान को अर्पित किए जाने वाले प्रसाद में अब मौसमी फल और शीतल पेय शामिल किए जा रहे हैं ताकि यह भोग भी मौसम के अनुकूल हो सके
अचलेश्वर मंदिर में भगवान भोलेनाथ की सेवा में विशेष परिवर्तन किए गए हैं यहां अभिषेक के लिए ठंडे पानी का उपयोग किया जा रहा है और गर्भगृह में कूलर लगाए गए हैं जिससे अंदर का तापमान नियंत्रित रखा जा सके इसके साथ ही पिंडी के ऊपर एक छेद वाला मटका रखा गया है जिससे लगातार जलधारा गिरती रहती है और शिवलिंग को शीतल बनाए रखती है मंदिर प्रशासन का कहना है कि जल्द ही यहां एसी की सुविधा भी शुरू की जाएगी
इसी तरह चक्रधर मंदिर में भी पूजा पद्धति में बदलाव देखने को मिल रहा है यहां भगवान को सूती वस्त्र पहनाने के साथ चंदन का लेप किया जा रहा है और भोग में खरबूजा तरबूज आम अनार जैसे रसदार फल और ठंडाई को शामिल किया गया है जो गर्मी में ठंडक पहुंचाने का काम करते हैं श्रद्धालु भी इस बदले हुए स्वरूप को देख संतोष और आस्था के साथ जुड़ रहे हैं
मंदिरों के पुजारियों के अनुसार यह बदलाव कोई नया प्रयोग नहीं बल्कि हर साल गर्मी के मौसम में अपनाई जाने वाली परंपरा का हिस्सा है उनका मानना है कि भगवान की सेवा भी प्रकृति और मौसम के अनुसार होनी चाहिए ताकि भक्ति का भाव और अधिक सजीव बना रहे
गौरतलब है कि ग्वालियर में इन दिनों तापमान लगातार बढ़ रहा है और गर्म हवाओं ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है बुधवार को अधिकतम तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि गुरुवार को न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से अधिक है दिन और रात दोनों समय गर्मी का असर महसूस किया जा रहा है ऐसे में मंदिरों में किए गए ये बदलाव न सिर्फ धार्मिक परंपराओं का पालन हैं बल्कि बदलते मौसम के प्रति संवेदनशीलता का भी उदाहरण बनकर सामने आ रहे हैं
