नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसी कहानी वायरल हो रही है, जिसने रिश्तों, पसंद और समाज की सोच पर बड़ी बहस छेड़ दी है। मामला एक 37 वर्षीय IIT पास तलाकशुदा युवक से जुड़ा है, जिसकी दुल्हन को लेकर रखी गई शर्तें इंटरनेट पर चर्चा और आलोचना का विषय बन गई हैं। इस पूरे मामले को सामने लाया मैचमेकर और डेटिंग कोच Oindrila Kapoor ने। उन्होंने बताया कि उनके पास एक क्लाइंट आया, जो एक मल्टी-बिलियन डॉलर कंपनी में डायरेक्टर है। प्रोफेशनली सफल होने के बावजूद उसकी शादी के लिए रखी गई शर्तें बेहद सख्त और चौंकाने वाली थीं।
30 साल से कम उम्र, ब्राह्मण और ‘नो पास्ट रिलेशन’ की मांग युवक की मांग थी कि उसकी होने वाली पत्नी 30 साल से कम उम्र की हो, ब्राह्मण परिवार से आती हो, कभी किसी रिलेशनशिप में न रही हो और ‘वर्जिन’ हो। साथ ही वह पहले से शादीशुदा भी न हो। यहां सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि खुद युवक तलाकशुदा है, लेकिन उसने अपने लिए ऐसी किसी शर्त को जरूरी नहीं माना।
30 साल से कम उम्र, ब्राह्मण और ‘नो पास्ट रिलेशन’ की मांग युवक की मांग थी कि उसकी होने वाली पत्नी 30 साल से कम उम्र की हो, ब्राह्मण परिवार से आती हो, कभी किसी रिलेशनशिप में न रही हो और ‘वर्जिन’ हो। साथ ही वह पहले से शादीशुदा भी न हो। यहां सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि खुद युवक तलाकशुदा है, लेकिन उसने अपने लिए ऐसी किसी शर्त को जरूरी नहीं माना।
‘महिलाओं के ज्यादा पार्टनर = बेवफाई’, युवक का तर्क
जब Oindrila Kapoor ने इन शर्तों की निष्पक्षता पर सवाल उठाया, तो युवक ने एक कथित रिसर्च का हवाला देते हुए कहा कि जिन महिलाओं के अधिक पार्टनर होते हैं, उनके बेवफा होने की संभावना ज्यादा होती है।
हालांकि, जब उससे पूछा गया कि क्या यही तर्क एक तलाकशुदा पुरुष पर भी लागू होगा, तो उसने इसे खारिज करते हुए कहा “मैं पुरुष हूं, इसलिए यह तुलना सही नहीं है।”
जब Oindrila Kapoor ने इन शर्तों की निष्पक्षता पर सवाल उठाया, तो युवक ने एक कथित रिसर्च का हवाला देते हुए कहा कि जिन महिलाओं के अधिक पार्टनर होते हैं, उनके बेवफा होने की संभावना ज्यादा होती है।
हालांकि, जब उससे पूछा गया कि क्या यही तर्क एक तलाकशुदा पुरुष पर भी लागू होगा, तो उसने इसे खारिज करते हुए कहा “मैं पुरुष हूं, इसलिए यह तुलना सही नहीं है।”
पितृसत्तात्मक सोच या व्यक्तिगत पसंद?
युवक के इस बयान ने सोशल मीडिया पर आग लगा दी। कई लोगों ने इसे स्पष्ट दोहरे मापदंड और पितृसत्तात्मक मानसिकता का उदाहरण बताया।
Oindrila Kapoor ने भी इस सोच को गलत बताते हुए उसे क्लाइंट बनाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह मामला धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि सोच का है और ऐसी सोच के साथ वह महिलाओं के साथ अन्याय करेगा।
युवक के इस बयान ने सोशल मीडिया पर आग लगा दी। कई लोगों ने इसे स्पष्ट दोहरे मापदंड और पितृसत्तात्मक मानसिकता का उदाहरण बताया।
Oindrila Kapoor ने भी इस सोच को गलत बताते हुए उसे क्लाइंट बनाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह मामला धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि सोच का है और ऐसी सोच के साथ वह महिलाओं के साथ अन्याय करेगा।
इंटरनेट पर छिड़ी बहस, आलोचना ज्यादा
पोस्ट वायरल होते ही सोशल मीडिया यूजर्स दो हिस्सों में बंट गए। एक बड़ा वर्ग युवक की आलोचना करता नजर आया। लोगों ने इसे महिलाओं का अपमान बताया और तंज कसते हुए कहा कि शायद इसी सोच के कारण उसका तलाक हुआ होगा।
कुछ यूजर्स ने यहां तक कहा कि तलाकशुदा व्यक्ति को समान स्थिति वाले पार्टनर की तलाश करनी चाहिए।
हालांकि, कुछ लोगों ने युवक का बचाव भी किया। उनका कहना था कि हर व्यक्ति को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का अधिकार है और तलाकशुदा होना तथा कई रिश्तों में रहना अलग-अलग बातें हैं।
पोस्ट वायरल होते ही सोशल मीडिया यूजर्स दो हिस्सों में बंट गए। एक बड़ा वर्ग युवक की आलोचना करता नजर आया। लोगों ने इसे महिलाओं का अपमान बताया और तंज कसते हुए कहा कि शायद इसी सोच के कारण उसका तलाक हुआ होगा।
कुछ यूजर्स ने यहां तक कहा कि तलाकशुदा व्यक्ति को समान स्थिति वाले पार्टनर की तलाश करनी चाहिए।
हालांकि, कुछ लोगों ने युवक का बचाव भी किया। उनका कहना था कि हर व्यक्ति को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का अधिकार है और तलाकशुदा होना तथा कई रिश्तों में रहना अलग-अलग बातें हैं।
बदलते भारत में पुरानी सोच की झलक
यह मामला ऐसे दौर में सामने आया है जब भारत में शादी को लेकर सोच बदल रही है। शहरी और शिक्षित वर्ग में शादी की उम्र बढ़ रही है, लेकिन दुल्हन के लिए कम उम्र और ‘परफेक्ट’ छवि की अपेक्षा अब भी बनी हुई है।
यह मामला ऐसे दौर में सामने आया है जब भारत में शादी को लेकर सोच बदल रही है। शहरी और शिक्षित वर्ग में शादी की उम्र बढ़ रही है, लेकिन दुल्हन के लिए कम उम्र और ‘परफेक्ट’ छवि की अपेक्षा अब भी बनी हुई है।
तलाक की दर भले ही भारत में अभी कम हो, लेकिन मेट्रो शहरों में यह धीरे-धीरे बढ़ रही है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या आधुनिक शिक्षा और करियर के बावजूद समाज का एक हिस्सा अब भी पारंपरिक और असमान सोच से बाहर नहीं निकल पाया है।
