मामला तब सामने आया जब आरोप लगाया गया कि कंपनी ने एक नोटिस जारी कर कर्मचारियों को तिलक, अंगूठी, कड़ा, बाली, मंगलसूत्र और बिंदी जैसे धार्मिक प्रतीक पहनकर आने से मना किया है। इस निर्णय को लेकर कर्मचारियों और विभिन्न संगठनों में नाराजगी देखने को मिल रही है।
हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चन्द्रशेखर तिवारी ने इस आदेश को धार्मिक आस्था और परंपराओं पर सीधा आघात बताया है। उन्होंने कहा कि इस तरह का प्रतिबंध किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा और यह कर्मचारियों की धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ है। समिति ने इस मामले में कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है।
इसके साथ ही संगठन ने कंपनी के उत्पादों के बहिष्कार की भी अपील की है, जिससे विवाद और अधिक बढ़ गया है। स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है और कई लोग इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर देख रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर कंपनी प्रबंधन का कहना है कि यह सर्कुलर उत्पादन प्रक्रिया और गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़ा हुआ है। उनका तर्क है कि कर्मचारियों द्वारा पहने जाने वाले आभूषण या धातु सामग्री के कारण प्रोडक्ट रिजेक्ट होने की संभावना रहती है, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है।
परमाली वालेस प्राइवेट लिमिटेड एक पुरानी कंपनी है जो लकड़ी और रेशे आधारित सांचों के निर्माण के क्षेत्र में काम करती है। कंपनी की स्थापना वर्ष 1961 में हुई थी और यह एक गैर-सूचीबद्ध निजी इकाई के रूप में कार्यरत है।
इस पूरे विवाद ने अब प्रशासन और सामाजिक संगठनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जहां एक तरफ इसे औद्योगिक नियमों से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर विरोध किया जा रहा है।
फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और मामले की जांच की संभावना जताई जा रही है। यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं।
