– योगेश कुमार गोयल
मलेरिया एक गंभीर और कभी-कभी प्राणघातक हो जाने वाली बीमारी है, जो आमतौर पर एक निश्चित प्रकार के मच्छर को संक्रमित करने वाले परजीवी के कारण होती है और इन संक्रमित मच्छरों के काटने से मलेरिया होता है। अमेरिका से करीब 70 साल पहले ही मलेरिया को पूरी तरह खत्म घोषित कर दिया गया था लेकिन अभी भी प्रतिवर्ष दो हजार अमेरिकी इससे संक्रमित होते हैं। भारत में तो हर साल लाखों लोग मलेरिया से संक्रमित होते हैं।
चिंता की स्थिति यह है कि दुनियाभर में मलेरिया से हर साल लाखों लोग मौत के मुंह में समा रहे हैं, जिनमें ज्यादातर छोटे बच्चे हैं। पांच साल से कम उम्र के बच्चे मलेरिया से असमान रूप से प्रभावित होते हैं, जो मलेरिया से होने वाली कुल मौतों का करीब 82 प्रतिशत है। 2021 में मलेरिया से दुनियाभर में 6.19 लाख लोगों की मौत हुई थी जबकि 2022 में 6.08 लाख लोग मलेरिया के कारण मारे गए और 2024 में मलेरिया से 6.1 लाख मौतें दर्ज की गई। हालांकि मलेरिया ऐसी बीमारी है, जिसकी रोकथाम करके बड़ी संख्या में होने वाली इन मौतों को रोका जा सकता है लेकिन यह दुनियाभर में रोकी जा सकने वाली बीमारी और मृत्यु का एक प्रमुख कारण बना हुआ है। इसीलिए मलेरिया को लेकर लोगों में जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से 2008 से ही 25 अप्रैल को एक खास विषय के साथ विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है।
इस वर्ष मलेरिया दिवस की थीम है- मलेरिया को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध: अब हम कर सकते हैं। अब हमें करना ही होगा। इसका प्रमुख संदेश यही है कि मलेरिया मुक्त विश्व के लक्ष्य को प्राप्त करना है। भेदभाव और कलंक को खत्म करना, स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेने में समुदायों को शामिल करना, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के माध्यम से स्वास्थ्य देखभाल को उस स्थान के करीब लाना, जहां लोग रहते हैं और काम करते हैं, मलेरिया के खतरे को बढ़ाने वाले कारकों को संबोधित करना, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज में मलेरिया नियंत्रण हस्तक्षेप इत्यादि मलेरिया दिवस मनाने के प्रमुख उद्देश्य हैं।
दरअसल विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि हर किसी को मलेरिया की रोकथाम, पता लगाने और इलाज के लिए गुणवत्तापूर्ण, समय पर और सस्ती सेवाओं का अधिकार तो है लेकिन यह सभी के लिए वास्तविकता नहीं है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दुनियाभर में मलेरिया के बीस करोड़ से भी ज्यादा नए मामले दर्ज किए जाते हैं, जिनमें से कई लाख लोगों की हर साल मौत हो जाती है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मलेरिया की रोकथाम के मामले में बीते कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति तो हुई है लेकिन मलेरिया के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और मलेरिया मुक्त विश्व के लक्ष्य को प्राप्त करना अभी भी गंभीर चुनौती है। चिंता का विषय यह भी है कि प्रभावित क्षेत्रों में यह बीमारी स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों और अर्थव्यवस्थाओं पर बड़ा बोझ भी डालती है।
मलेरिया एनोफेलीज मादा मच्छर के काटने से होता है, जो प्लाज्मोडियम परजीवी से संक्रमित होता है और जब यह मच्छर किसी को काटता है तो ये परजीवी मानव रक्त में प्रवेश करके लिवर तथा लाल रक्त कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगते हैं और व्यक्ति को बीमार बना देते हैं। इस रोग की गंभीरता परजीवी पर ही निर्भर करती है। मनुष्यों में सबसे आम मलेरिया परजीवी प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम है, जो बीमारी के सबसे घातक रूप के लिए जिम्मेदार है। एनोफेलीज मच्छर वाहक के रूप में कार्य करते हैं, जब वे एक संक्रमित व्यक्ति को काटते हैं और फिर दूसरे व्यक्ति को काटते हैं तो परजीवियों को प्रसारित करते हैं। जब परजीवी एक बार मानव शरीर के अंदर यकृत में चले जाते हैं तो ये लाल रक्त कोशिकाओं के अंदर गुणन करते हैं, जिससे कई प्रकार के लक्षण पैदा होते हैं। मनुष्यों को मलेरिया के चार मुख्य प्रकार (प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम, प्लाज्मोडियम विवैक्स, प्लाज्मोडियम ओवले और प्लाज्मोडियम मलेरिया) संक्रमित करते हैं। प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम सबसे खतरनाक प्रकार है जबकि मलेरिया के अन्य प्रकार आमतौर पर हल्की बीमारी का कारण बनते हैं।
गंभीर मलेरिया गंभीर एनीमिया, गुर्दे की विफलता, दौरे, कोमा और यहां तक कि मृत्यु जैसी जटिलताओं का कारण भी बन सकता है, खासकर यदि तुरंत निदान और इलाज नहीं किया जाए। हालांकि दुनियाभर में शोधकर्ता मलेरिया को नियंत्रित करने और अंततः ख़त्म करने के लिए टीकों और अन्य नवीन समाधानों पर काम कर रहे हैं लेकिन इसकी रोकथाम के मुख्य उपायों में उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में मच्छरदानी, कीट विकर्षक और मलेरिया-रोधी दवाओं का उपयोग करना शामिल है। जटिलताओं और मृत्यु को रोकने के लिए प्रभावी मलेरिया-रोधी दवाओं के साथ शीघ्र निदान और उपचार महत्वपूर्ण है।
मलेरिया होने पर आमतौर पर तेज बुखार होता है, जो 103 से 105 डिग्री तक हो सकता है। सिरदर्द, बदन दर्द, घबराहट, अत्यधिक पसीना आना, जी मिचलाना, उल्टी होना, अत्यधिक ठंड लगना, कमजोरी इत्यादि मलेरिया के अन्य प्रमुख लक्षण हैं। इन लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज करना भी खतरनाक हो सकता है। वैसे तो मलेरिया के लक्षण प्रायः 24 से 48 घंटे में ही नजर आ सकते हैं लेकिन कई बार लक्षण सामने आने में ज्यादा समय भी लग सकता है। मलेरिया की जांच से ही पता चल पाता है कि मरीज किस तरह के मलेरिया से ग्रसित है और उसी के आधार पर विभिन्न दवाओं से उसका इलाज शुरू किया जाता है। साधारण मलेरिया होने पर सही इलाज से मरीज 3-5 दिनों में ठीक हो सकता है लेकिन यदि सीवियर फाल्सीपेरम मलेरिया हुआ तो समय पर और सही इलाज नहीं कराने पर मरीज की मौत भी हो सकती है।
इसलिए बेहद जरूरी है कि मलेरिया की जांच और इलाज में कोताही न बरतें। गर्मी और मानूसन के दौरान मच्छरों की संख्या बहुत बढ़ जाती है, इसलिए आमतौर पर मलेरिया इन्हीं मौसम में सबसे ज्यादा होता है। वैसे मलेरिया के मच्छर अधिकांशतः उन्हीं जगहों पर पनपते हैं, जहां गंदगी होती है या गंदा पानी जमा होता है। इसलिए मलेरिया की रोकथाम के लिए सबसे जरूरी है कि अपने घरों में तथा आसपास गंदगी और गंदा पानी एकत्र न होने दें।
