इस विवाह समारोह की जानकारी तब सार्वजनिक हुई जब समारोह का एक वीडियो इंटरनेट पर तेजी से प्रसारित होने लगा। वीडियो में देखा जा सकता है कि जिस स्थान पर अर्थियां जलाई जाती हैं, वहां बिजली की झालरें और भव्य सजावट की गई थी। मेहमानों की मौजूदगी में जोड़े ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई। जैसे ही यह दृश्य स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सामने आया, विरोध के स्वर तेज हो गए। लोगों का कहना है कि श्मशान घाट को शास्त्रों में वैराग्य और दुख का स्थान माना गया है, वहां इस तरह का जश्न मनाना हिंदू परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं का सीधा अपमान है। स्थानीय लोगों ने इसे आस्था के साथ खिलवाड़ करार देते हुए कड़ा ऐतराज जताया है।
विरोध की आंच अब प्रशासन तक भी पहुंच गई है। अधिकारियों ने इस मामले पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी भी सार्वजनिक स्थान, विशेषकर अंत्येष्टि स्थलों का उपयोग किसी निजी मांगलिक कार्य के लिए करना नियमों के खिलाफ है। प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस तरह के आयोजन के लिए कोई पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी, जो कि कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है। सामाजिक संगठनों का आरोप है कि आधुनिकता के नाम पर इस तरह के संवेदनशील स्थानों की गरिमा को ठेस पहुँचाना अनुचित है। फिलहाल, इस अनोखी लेकिन विवादित शादी ने देवभूमि में एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां एक पक्ष इसे व्यक्तिगत चुनाव मान रहा है, तो वहीं दूसरा पक्ष इसे समाज और धर्म की मर्यादा का उल्लंघन बता रहा है।
