इस नए फीचर के तहत जब भी कोई वेबसाइट लोकेशन एक्सेस की अनुमति मांगेगी, यूजर के पास यह विकल्प होगा कि वह अपनी असली GPS लोकेशन साझा करे या केवल सामान्य एरिया की जानकारी दे। इसका मकसद यह है कि वेबसाइट्स को जरूरत से ज्यादा डिटेल्ड लोकेशन डेटा न मिल सके।
अब तक होता यह था कि लोकेशन परमिशन देने पर वेबसाइट्स यूजर की बिल्कुल सटीक जगह तक पहुंच सकती थीं, जिससे कई बार प्राइवेसी को लेकर चिंता बढ़ जाती थी। लेकिन नए अपडेट के बाद यह डेटा लिमिटेड रहेगा और सिर्फ क्षेत्रीय जानकारी ही शेयर होगी।
हालांकि Google ने यह भी साफ किया है कि कुछ जरूरी सेवाओं जैसे नेविगेशन, कैब बुकिंग, फूड डिलीवरी या आसपास की सटीक लोकेशन खोजने वाले ऐप्स में Precise Location की जरूरत बनी रहेगी। ऐसे मामलों में यूजर को पहले की तरह पूरा लोकेशन एक्सेस देना होगा।
कंपनी के मुताबिक इस बदलाव का उद्देश्य यूजर्स को ज्यादा कंट्रोल देना और अनावश्यक लोकेशन ट्रैकिंग को रोकना है। इससे उन वेबसाइट्स की मनमानी भी कम होगी जो बिना जरूरत यूजर्स का सटीक लोकेशन डेटा इकट्ठा करती थीं।
फिलहाल यह फीचर मोबाइल यूजर्स के लिए शुरू किया गया है और आने वाले समय में इसे डेस्कटॉप वर्जन में भी लागू किए जाने की संभावना है।
