बालकनी सोलर सिस्टम छोटे आकार का सोलर सेटअप होता है, जिसमें सोलर पैनल, माइक्रो इन्वर्टर और प्लग सिस्टम शामिल होता है। यह सूर्य की रोशनी से बिजली बनाकर सीधे घर के इलेक्ट्रिक सॉकेट से जुड़ सकता है। इसकी खास बात यह है कि इसे लगाने के लिए भारी निर्माण कार्य या जटिल वायरिंग की जरूरत नहीं पड़ती।
विशेषज्ञों के अनुसार यह सिस्टम खास तौर पर फ्लैट, छोटे घर और किराए के मकानों में रहने वालों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। अगर बालकनी में पर्याप्त धूप आती है, तो इससे पंखा,लाइट इमिटिंग डायोड लाइट, टीवी, वाई-फाई राउटर, मोबाइल चार्जर और छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आसानी से चलाए जा सकते हैं।
सोलर पैनल लगाने के लिए सबसे पहले ऐसी जगह चुननी होती है जहां दिनभर अच्छी धूप आती हो। इसके बाद पैनल को मजबूत स्टैंड या रेलिंग पर फिट किया जाता है और माइक्रो इन्वर्टर के जरिए घर के पावर सॉकेट से जोड़ा जाता है। जरूरत पड़ने पर बैटरी स्टोरेज भी लगाया जा सकता है ताकि रात में भी सोलर बिजली इस्तेमाल हो सके।
रिपोर्ट्स के मुताबिक 800 से 1200 वॉट तक का छोटा बालकनी सोलर सिस्टम हर महीने बिजली बिल में अच्छी बचत करा सकता है। बचत की वास्तविक राशि शहर की बिजली दर और मिलने वाली धूप पर निर्भर करती है।
यूरोप, खासकर जर्मनी में बालकनी सोलर सिस्टम तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। भारत में भी दिल्ली, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे धूप वाले राज्यों में इसकी मांग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में छोटे Plug-in Solar सिस्टम घरेलू बिजली बचत का बड़ा विकल्प बन सकते हैं।
