ऑटो एक्सपर्ट्स के मुताबिक, विंडशील्ड के किनारों पर बने ये ब्लैक डॉट्स खास तरह के सिरेमिक पेंट से तैयार किए जाते हैं, जिन्हें कांच पर बेहद ऊंचे तापमान में बेक किया जाता है। यही वजह है कि ये लंबे समय तक टिके रहते हैं और आसानी से मिटते नहीं हैं।
दरअसल कार की विंडशील्ड को फ्रेम से जोड़ने के लिए यूरेथेन सीलेंट नाम की खास गोंद का इस्तेमाल किया जाता है। तेज धूप और गर्मी में यह सीलेंट कमजोर पड़ सकता है, लेकिन फ्रिट्स सूरज की सीधी किरणों को रोककर इस गोंद को सुरक्षित रखते हैं। इससे विंडशील्ड मजबूती से अपनी जगह पर टिकी रहती है और ढीली होने का खतरा कम हो जाता है।
इन काली बिंदियों का एक और बड़ा फायदा तापमान को संतुलित बनाए रखना है। जब धूप सीधे कांच पर पड़ती है तो अलग-अलग हिस्सों का तापमान तेजी से बदल सकता है, जिससे ‘लेंसिंग’ नाम की समस्या पैदा होती है। इस स्थिति में सड़क या आसपास की चीजें टेढ़ी-मेढ़ी दिखाई देने लगती हैं। फ्रिट्स गर्मी को समान रूप से फैलाने में मदद करते हैं, जिससे ऑप्टिकल डिस्टॉर्शन कम हो जाता है और ड्राइविंग ज्यादा सुरक्षित बनती है।
इतना ही नहीं, ये ब्लैक डॉट्स कांच की सतह को हल्का खुरदरा भी बनाते हैं। इस प्रक्रिया को ‘Etching’ कहा जाता है। इसकी वजह से विंडशील्ड और कार फ्रेम के बीच पकड़ और मजबूत हो जाती है। यही कारण है कि तेज झटकों या हादसों के दौरान भी शीशा अपनी जगह पर बना रहता है।
ऑटोमोबाइल कंपनियां इस तकनीक को यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी मानती हैं। अगर किसी वजह से ये काली बिंदियां घिसने लगें, धुंधली पड़ जाएं या टूट जाएं तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि खराब फ्रिट्स की वजह से विंडशील्ड कमजोर हो सकती है और लंबे समय में यह बड़ा खतरा बन सकती है।
आज की आधुनिक कारों में फ्रिट टेक्नोलॉजी को सुरक्षा मानकों का अहम हिस्सा माना जाता है। यही वजह है कि अगली बार जब आप अपनी कार की विंडशील्ड पर बने ये छोटे-छोटे काले डॉट्स देखें, तो समझ जाइए कि ये सिर्फ डिजाइन नहीं बल्कि आपकी सुरक्षा की एक मजबूत ढाल हैं।
