ज्योतिष गणना के अनुसार रोग पंचक 10 मई 2026 को दोपहर 12 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर 14 मई 2026 की रात 10 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। पंचक तब बनता है जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में भ्रमण करते हुए धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों से गुजरता है। वहीं रविवार के दिन शुरू होने वाले पंचक को रोग पंचक कहा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक काल को ऊर्जा परिवर्तन का समय माना गया है। इस दौरान शरीर और मन दोनों को संतुलित रखना बेहद जरूरी बताया गया है। मान्यता है कि इस समय लापरवाही करने पर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। खासकर जब मौसम तेजी से बदल रहा हो, तब सर्दी, वायरल, बुखार, एलर्जी और संक्रमण जैसी समस्याएं लोगों को अधिक परेशान कर सकती हैं।
मौसम विभाग की ओर से कई राज्यों में बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी भी जारी की गई है। दिन में तेज गर्मी और शाम को अचानक मौसम बदलने से लोगों की इम्यूनिटी पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि रोग पंचक के दौरान स्वास्थ्य को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।
ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार रोग पंचक के समय बाहर का बासी और तला-भुना भोजन खाने से बचना चाहिए। नियमित रूप से हल्दी, तुलसी और गुनगुने पानी का सेवन लाभकारी माना गया है। साथ ही पूजा-पाठ, ध्यान और महामृत्युंजय मंत्र का जाप मानसिक तनाव कम करने और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में मदद कर सकता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, सगाई, दक्षिण दिशा की यात्रा और घर निर्माण जैसे शुभ कार्यों से भी बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि ज्योतिष और धार्मिक मान्यताएं आस्था का विषय हैं, इसलिए किसी भी स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर की सलाह लेना सबसे जरूरी माना जाता है।
