इस पहल का उद्देश्य 6G टेक्नोलॉजी पर रिसर्च को बढ़ावा देना और इसे औद्योगिक स्तर पर विकसित करना है। इन ट्रायल्स में इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) द्वारा निर्धारित प्रमुख फीचर्स जैसे अल्ट्रा-हाई डेटा स्पीड, बेहद कम लेटेंसी, बड़े पैमाने पर कनेक्टिविटी और इंटीग्रेटेड सेंसिंग पर काम किया जाएगा। इस चरण में शोधकर्ता तकनीकी चुनौतियों को हल करने के लिए R&D और वेरिफिकेशन टेस्टिंग करेंगे।
चीन का IMT-2030 प्रमोशन ग्रुप, जिसमें टेलीकॉम कंपनियां, रिसर्च इंस्टीट्यूट और यूनिवर्सिटीज शामिल हैं, 6G विकास को तेज करने में अहम भूमिका निभा रहा है। यह कदम 5G और 5G-एडवांस्ड डिप्लॉयमेंट के बाद अगला बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
उधर भारत भी 6G तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अनुसार, 6G केवल तेज इंटरनेट नहीं होगा, बल्कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इमर्सिव टेक्नोलॉजी और इंटेलिजेंट इंटरनेट ऑफ एवरीथिंग की दिशा में बड़ा बदलाव लाएगा। भारत इस क्षेत्र में पेटेंट और रिसर्च के स्तर पर मजबूत स्थिति बनाने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि 6G स्पेक्ट्रम आवंटन और वैश्विक मानकों को लेकर अंतिम निर्णय अभी ITU और 3GPP द्वारा लिया जाना बाकी है। ऐसे में चीन की यह तेज़ प्रगति वैश्विक 6G रेस को और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बना रही है, जिसमें भारत भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी में है।
