शाजापुर/अकोदिया।
अकोदिया नगर में वर्ष 1984 से संचालित शासकीय कन्या शाला विद्यालय को सांदीपनि विद्यालय में मर्ज किए जाने के फैसले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चार दशक से अधिक समय से हजारों छात्राओं के भविष्य को दिशा देने वाले इस विद्यालय के विलय से नगर में व्यापक आक्रोश है। अभिभावक, छात्राएं, शिक्षक और नगरवासी इसे केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि बेटियों की सुरक्षित शिक्षा व्यवस्था पर सीधा प्रहार मान रहे हैं।
नगरवासियों का कहना है कि जिस विद्यालय ने वर्षों तक छात्राओं को सुरक्षित वातावरण, उत्कृष्ट शिक्षा और अनुशासित शैक्षणिक माहौल दिया, उसी संस्था की पहचान खत्म कर देना समझ से परे है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब विद्यालय संसाधनों, परिणामों और सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से बेहतर स्थिति में था, तब आखिर उसे समाप्त करने की जरूरत क्यों पड़ी?
यह विद्यालय लंबे समय तक संकुल केंद्र के रूप में कार्य करता रहा, जहां शिक्षा विभाग की प्रशासनिक और शैक्षणिक गतिविधियां संचालित होती थीं। अकोदिया सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की हजारों छात्राएं यहां अध्ययन कर चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक स्कूल नहीं, बल्कि क्षेत्र में बेटियों की शिक्षा का भरोसेमंद केंद्र रहा है।
अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग जमीनी वास्तविकताओं से दूर बैठकर ऐसे फैसले ले रहा है, जिनका सीधा असर छात्राओं की सुरक्षा और सुविधा पर पड़ेगा। उनका कहना है कि अलग कन्या विद्यालय होने से छात्राओं और अभिभावकों दोनों में सुरक्षा की भावना बनी रहती थी, लेकिन अब यह व्यवस्था कमजोर होगी।
विद्यालय के प्राचार्य लखन सिंह बरौले ने भी माना कि संस्था भौतिक और शैक्षणिक दृष्टि से पूरी तरह सुविधायुक्त है। उन्होंने कहा कि विद्यालय से छात्राओं, शिक्षकों और नगरवासियों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। इसके बावजूद शासन की नई नीति के तहत यह परिवर्तन किया गया है।
शिक्षकों के अनुसार विद्यालय का परीक्षा परिणाम हर वर्ष उत्कृष्ट रहा है और छात्राओं के संस्कार निर्माण में भी इस संस्था की बड़ी भूमिका रही है। यही कारण है कि अब इस फैसले को लेकर जनभावनाएं खुलकर सामने आने लगी हैं।
सुरक्षा और सुविधाओं से लैस था कन्या विद्यालय
शासकीय कन्या शाला विद्यालय में वर्तमान में करीब 300 छात्राएं अध्ययनरत हैं। परिसर में 13 सीसीटीवी कैमरे, 14 कक्ष, सुरक्षित बाउंड्री वॉल, लैब और पुस्तकालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। विद्यालय में 11 शिक्षक एवं 3 प्रायोगिक शिक्षक पदस्थ हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर में छात्राओं के लिए इससे अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित परिसर दूसरा नहीं है। ऐसे में इस विद्यालय की अलग पहचान खत्म करना समझ से परे है।
शिक्षकों और विद्यालयों के लिए भी था प्रमुख केंद्र
यह विद्यालय केवल छात्राओं की पढ़ाई तक सीमित नहीं था, बल्कि वर्षों से संकुल केंद्र के रूप में कार्य करते हुए आसपास के विद्यालयों और शिक्षकों के लिए प्रशासनिक सुविधा केंद्र बना हुआ था। लगभग 150 शिक्षक इस संकुल से जुड़े रहे हैं और स्थापना सहित कई महत्वपूर्ण कार्य यहीं संपादित होते रहे हैं।
नई क्लस्टर व्यवस्था में खत्म हुई संकुल प्रणाली
जानकारी के अनुसार शुजालपुर विकासखंड में अब पांच क्लस्टर बनाए गए हैं। संकुल व्यवस्था पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। अकोदिया को हटाकर मो. खेड़ा विद्यालय को एरिया एजुकेशन ऑफिस में परिवर्तित किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक सांदीपनि विद्यालय में शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को प्राथमिकता देने की नीति के तहत कन्या विद्यालय को वहां मर्ज किया गया है। हालांकि स्थानीय लोग इसे “व्यवस्था सुधार” नहीं बल्कि “स्थापित संस्थाओं को कमजोर करने” वाला कदम बता रहे हैं।
इनका कहना है
“शा. कन्या शाला अकोदिया को सांदीपनि विद्यालय में मर्ज किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सके। यह निर्णय विद्यार्थियों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर लिया गया है।”
— राजेंद्र शिप्रे, जिला शिक्षा अधिकारी, शाजापुर
“यह सबसे सुविधायुक्त एवं शांतिपूर्ण परिसर है। छात्राओं के लिए यह विद्यालय सबसे सुरक्षित माना जाता है।”
— मुकेश खत्री, नगरवासी
“यह विद्यालय बंद नहीं होना चाहिए। नगर एवं आसपास के गांवों की छात्राएं यहां अध्ययन करने आती हैं।”
— धर्मेंद्र सिंह राजपूत, अभिभावक
“यह विद्यालय छात्राओं की शिक्षा के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है। इसका परिवर्तन नहीं होना चाहिए।”
— प्रमोद मालवीय, अभिभावक
