करैरा(शिवपुरी)।
करैरा अनुभाग के अंतर्गत आने वाला समोहा पिकअप वियर वर्षों से क्षेत्र के कई गांवों की सिंचाई और पेयजल व्यवस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, लेकिन इसी डेम परिसर में लाखों रुपये की लागत से निर्मित सिंचाई विभाग का विश्रामगृह आज अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है। हालत यह है कि सरकारी विश्रामगृह को दबंगों ने कब्जाकर भूसा और गोबर रखने का अड्डा बना दिया है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
गुरुवार 28 मई को करैरा विधायक रमेश खटीक के विधायक प्रतिनिधि विवेक चतुर्वेदी ने ग्रामीणों की शिकायत पर समोहा डेम का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में जो तस्वीर सामने आई, उसने सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की निष्क्रियता की पूरी पोल खोलकर रख दी।
विश्रामगृह के भीतर भारी मात्रा में भूसा भरा मिला, वहीं परिसर में गोबर और गंदगी फैली हुई थी। जिस भवन को शैलानियों और अधिकारियों के ठहरने के लिए सुविधायुक्त बनाया गया था, वह अब उपेक्षा, अव्यवस्था और कब्जे का प्रतीक बन चुका है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के बिना सरकारी भवन का इस तरह दुरुपयोग संभव नहीं है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि आखिर सरकारी संपत्ति पर कब्जा करने वालों के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
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सजावट और सुविधाओं का सामान भी गायब
जानकारी के अनुसार विश्रामगृह को तैयार करते समय यहां फर्नीचर, सजावटी सामग्री और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं ताकि डेम क्षेत्र में आने वाले अधिकारी और पर्यटक यहां ठहर सकें। लेकिन अब अधिकांश सामान गायब है।
भवन की हालत देखकर साफ प्रतीत होता है कि वर्षों से इसकी देखरेख नहीं की गई। दीवारों पर गंदगी, जर्जर हालत और परिसर में फैली अव्यवस्था विभागीय लापरवाही की गवाही दे रही है। अब यह पूरा मामला जांच का विषय बनता नजर आ रहा है।
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“निरीक्षण में कई गंभीर खामियां मिलीं”
विधायक प्रतिनिधि विवेक चतुर्वेदी ने कहा कि ग्रामीणों की शिकायत पर समोहा डेम का औचक निरीक्षण किया गया, जिसमें विश्रामगृह सहित कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। इसकी पूरी जानकारी विधायक रमेश खटीक को दे दी गई है।
उन्होंने संकेत दिए कि मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की मांग की जाएगी।
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सवाल जो उठ रहे हैं…
सरकारी विश्रामगृह में भूसा और गोबर भरने की अनुमति किसने दी?
लाखों की लागत से बनी संपत्ति की देखरेख कौन करेगा?
विश्रामगृह से गायब हुई सामग्री का जिम्मेदार कौन है?
क्या विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी भवन का दुरुपयोग हो रहा था?
समोहा डेम का यह विश्रामगृह आज केवल एक जर्जर भवन नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही और तंत्र की निष्क्रियता की जीवित तस्वीर बन चुका है।
