शिवपुरी- भ्रूण लिंग परीक्षण जैसी कुप्रथा पर शिकंजा कसने के लिए जिला प्रशासन अब और सख्त नजर आ रहा है। अर्पित वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित पीसीपीएनडीटी एक्ट की जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक में साफ संदेश दिया गया कि प्रसव पूर्व भ्रूण लिंग परीक्षण न सिर्फ सामाजिक अपराध है, बल्कि यह कानूनन भी गंभीर दंडनीय अपराध है।
कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में कलेक्टर श्री वर्मा ने जिले में संचालित सभी सोनोग्राफी केंद्रों की नियमित एवं औचक जांच के निर्देश देते हुए कहा कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित केंद्रों के खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पीसीपीएनडीटी एक्ट का पालन केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि इसकी जमीनी मॉनिटरिंग भी प्रभावी ढंग से हो।
बैठक के दौरान जिले के गिरते लिंगानुपात पर चिंता व्यक्त करते हुए कलेक्टर ने कहा कि बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रूण लिंग परीक्षण पर रोक लगाने के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि सामाजिक जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है।
इसी उद्देश्य से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। स्वास्थ्य विभाग, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों के माध्यम से लोगों को बेटी बचाओ और महिला सम्मान के प्रति जागरूक किया जाएगा।
बैठक में वरिष्ठ पत्रकार आलोक एम इंदौरिया, अधिवक्ता संजीव विलगैया, समाजसेवी समीर गांधी एवं रमेश अग्रवाल सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
