मंदिर प्रशासन के अनुसार हाल ही में आयोजित मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बैठक में समिति अध्यक्ष एवं इंदौर कलेक्टर Shivam Verma तथा नगर निगम आयुक्त Kshitij Singhal सहित अन्य अधिकारियों ने श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया।
निर्णय के बाद विकास कार्यों की तैयारी शुरू कर दी गई है। सबसे पहले गर्भगृह के मुख्य द्वार पर लगी लगभग 150 किलो चांदी को सावधानीपूर्वक हटाया गया है। यह चांदी वर्षों से मंदिर के प्रवेश द्वार की शोभा बढ़ा रही थी। अब निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसके पुनः उपयोग या स्थापना को लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा।
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अशोक भट्ट के अनुसार, गर्भगृह का द्वार चौड़ा होने से श्रद्धालुओं को भगवान गणेश के दर्शन करने में अधिक सुविधा मिलेगी। वर्तमान में विशेष अवसरों और त्योहारों पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है, जिससे दर्शन व्यवस्था प्रभावित होती है। सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भवन की संरचनात्मक मजबूती का परीक्षण भी कराया जा रहा है। इसके लिए Shri Govindram Seksaria Institute of Technology and Science (एसजीएसआईटीएस) की विशेषज्ञ टीम ने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया है। इंजीनियरों ने दीवारों, द्वार और आसपास की संरचना की तकनीकी जांच की है, ताकि विस्तार कार्य के दौरान मंदिर की मूल संरचना सुरक्षित रहे।
मंदिर प्रशासन का कहना है कि परीक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद ही निर्माण कार्य की अंतिम रूपरेखा तय की जाएगी। यदि रिपोर्ट अनुकूल रहती है तो आगामी दिनों में गर्भगृह के द्वार को चौड़ा करने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
खजराना गणेश मंदिर न केवल इंदौर बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में यह विकास कार्य मंदिर की धार्मिक गरिमा बनाए रखते हुए श्रद्धालुओं को बेहतर और सुविधाजनक दर्शन व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
