मंत्री सारंग ने प्रभात चौराहा, महामाई की पुलिया, द्वारका नगर, भानपुर खंती सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों का दौरा कर नालों की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से सफाई कार्य की प्रगति और मानसून की तैयारियों की जानकारी भी ली। कई स्थानों पर नालों में गाद और कचरा जमा मिलने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि बारिश शुरू होने से पहले सभी नालों की पूरी तरह सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि नागरिकों को जलभराव की समस्या का सामना न करना पड़े।
निरीक्षण के दौरान शहर के सबसे महत्वपूर्ण और बड़े जल निकासी मार्गों में शामिल पातरा नाले की स्थिति देखकर मंत्री विशेष रूप से नाराज नजर आए। उन्होंने पाया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के निर्माण कार्य के कारण नाले में बड़ी मात्रा में मिट्टी जमा हो गई है। इससे नाले की जल निकासी क्षमता प्रभावित होने की आशंका जताई गई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि यदि समय रहते मिट्टी नहीं हटाई गई तो बारिश के दौरान पानी का बहाव बाधित होगा और आसपास के क्षेत्रों में गंभीर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
मंत्री के निर्देश मिलते ही प्रशासन और नगर निगम के अमले ने मौके पर सफाई कार्य शुरू कर दिया। नाले से मिट्टी हटाने के लिए मशीनें लगाई गईं और कर्मचारियों को तत्काल काम में जुटा दिया गया। सारंग ने स्पष्ट कहा कि नाले की मूल चौड़ाई और गहराई को बनाए रखते हुए सफाई का कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।
निरीक्षण के दौरान नालों और जल निकासी मार्गों पर किए गए अतिक्रमण भी मंत्री के निशाने पर रहे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां भी अवैध कब्जे या बाधाएं हैं, उन्हें तत्काल हटाने की कार्रवाई की जाए। उनके अनुसार अतिक्रमण के कारण जल निकासी प्रभावित होती है और हर वर्ष बारिश में लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
मंत्री सारंग ने नगर निगम और जिला प्रशासन को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की हिदायत देते हुए कहा कि मानसून शुरू होने से पहले सभी आवश्यक मरम्मत और सफाई कार्य पूरे कर लिए जाएं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता नागरिकों को सुरक्षित और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। बारिश के दौरान कहीं भी जलभराव, बाढ़ या यातायात बाधित होने जैसी स्थिति न बने, इसके लिए सभी विभागों को पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा।
राजधानी में मानसून पूर्व तैयारियों की समीक्षा के दौरान मंत्री की सक्रियता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार प्रशासन जलभराव की समस्या को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही के मूड में नहीं है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग तय समय में सभी व्यवस्थाओं को कितना दुरुस्त कर पाते हैं।
