इस पहल की शुरुआत केरल से मानी जा रही है, जहां कैबिनेट स्तर पर AI से जुड़ी जिम्मेदारियों को अलग पहचान दी गई। राज्य सरकार ने वरिष्ठ नेता को उद्योग, आईटी और AI समेत कई तकनीकी विभागों का प्रभार सौंपा है। इस निर्णय को इस संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि AI अब केवल तकनीकी नवाचार का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह आर्थिक और प्रशासनिक विकास की रणनीति का हिस्सा बन चुका है।
केरल के बाद तमिलनाडु ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाया है और AI, आईटी तथा डिजिटल सेवाओं के लिए अलग जिम्मेदारी तय की गई है। राज्य में AI आधारित प्रशासन, कौशल विकास और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। स्वास्थ्य, कृषि और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में AI के उपयोग को विस्तार देने की भी योजना है, जिससे सेवाओं की दक्षता और गुणवत्ता बढ़ाई जा सके।
तमिलनाडु सरकार ने पहले ही अपने विजन डॉक्यूमेंट में AI आधारित विश्वविद्यालय और तकनीकी शहर विकसित करने की बात कही थी, जिसे अब धीरे-धीरे लागू किया जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि राज्य AI को दीर्घकालिक विकास मॉडल के रूप में देख रहा है और इसके लिए संस्थागत ढांचा तैयार किया जा रहा है।
वहीं कर्नाटक ने इस मॉडल से अलग दृष्टिकोण अपनाया है। राज्य का मानना है कि AI के लिए अलग मंत्रालय बनाने की बजाय तकनीक-आधारित एकीकृत ढांचा अधिक व्यावहारिक है। वहां पहले से ही AI-ML सेल और जिम्मेदार AI समिति जैसे संस्थागत ढांचे सक्रिय हैं, जो तकनीकी विकास और उसके नैतिक उपयोग पर निगरानी रखते हैं। कर्नाटक का जोर इस बात पर है कि तकनीक लगातार बदलती रहती है, इसलिए प्रशासनिक ढांचे को भी लचीला होना चाहिए।
महाराष्ट्र ने भी AI को लेकर व्यापक नीति और विभागीय विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और AI विभाग को एक साथ जोड़कर नई संरचना तैयार की जा रही है। इसके तहत AI इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार सृजन और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राज्य में AI नवाचार शहर और उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की योजना भी शामिल है, जिससे स्टार्टअप और शोध को बढ़ावा मिल सके।
विशेषज्ञों के बीच इस बात पर मतभेद है कि क्या AI के लिए अलग मंत्री या मंत्रालय वास्तव में आवश्यक है या यह केवल प्रतीकात्मक कदम है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल संरचना बनाने से बदलाव नहीं आता, इसके लिए बजट, शोध और स्पष्ट नीतियों की जरूरत होती है। वहीं कुछ का मानना है कि तकनीक की जटिलता को देखते हुए विशेषज्ञ नेतृत्व जरूरी है ताकि सही दिशा में नीति निर्माण हो सके।
राष्ट्रीय स्तर पर भारत सरकार AI को लेकर कई योजनाओं पर काम कर रही है और इसे डिजिटल भविष्य का अहम हिस्सा मान रही है। साथ ही वैश्विक स्तर पर भी कई देश पहले से ही AI प्रशासन के लिए विशेष पद और संस्थाएं बना चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आने वाले समय में AI शासन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहा है।
