शुक्रवार को किए गए एक पोस्ट में नियाज खान ने देश की बढ़ती जनसंख्या को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि इस विषय पर सख्त नीति बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने दावा किया कि देश की आबादी तेजी से बढ़ रही है और इससे भविष्य में संसाधनों तथा विकास पर दबाव बढ़ सकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कठोर उपायों की आवश्यकता बताई। अपने पोस्ट में उन्होंने विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय का उल्लेख करते हुए दावा किया कि इस समुदाय में अधिक बच्चे पैदा होते हैं और सरकार को इस दिशा में सख्ती से कदम उठाने चाहिए।
नियाज खान के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे जनसंख्या नियंत्रण पर बहस का विषय बताया, जबकि अन्य लोगों ने उनके बयान की आलोचना करते हुए इसे एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने वाला बताया। हालांकि इस मुद्दे पर किसी सरकारी एजेंसी या संबंधित पक्ष की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इसी दिन किए गए एक अन्य पोस्ट में नियाज खान ने देश में भ्रष्टाचार की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने दावा किया कि भ्रष्टाचार देश को भीतर से कमजोर कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद आम लोग इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। अपने पोस्ट में उन्होंने कहा कि मतदाता भ्रष्ट छवि वाले नेताओं को भी चुनावों में जीत दिलाते हैं और समाज में नैतिक मूल्यों का ह्रास दिखाई देता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ऐसी परिस्थितियों में भारत को विश्व शक्ति बनाने के दावे कितने व्यवहारिक हैं।
इससे पहले गुरुवार को किए गए एक पोस्ट में नियाज खान ने देश की राजनीति में वैचारिक संकट का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता प्राप्त करने के लिए कई नेता अपनी विचारधारा बदल लेते हैं। उनके अनुसार राजनीतिक दलों और नेताओं की वैचारिक प्रतिबद्धता कमजोर होती जा रही है और परिस्थितियों के अनुसार विचारधाराएं बदलने का चलन बढ़ा है। खान ने यह भी कहा कि आम जनता अक्सर इन बदलावों को केवल दर्शक बनकर देखती रहती है।
गौरतलब है कि नियाज खान प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक विषयों पर अपनी स्पष्ट राय रखने के लिए जाने जाते हैं। वे समय-समय पर सोशल मीडिया के माध्यम से विभिन्न मुद्दों पर टिप्पणी करते रहे हैं, जिसके कारण उनके बयान अक्सर चर्चा और विवाद का विषय बन जाते हैं।
फिलहाल उनके हालिया पोस्टों को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस जारी है। समर्थक जहां उनके बयानों को बेबाक राय के रूप में देख रहे हैं, वहीं आलोचक उनके कुछ दावों और टिप्पणियों पर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।
