अदालती कार्यवाही के दौरान सलमान खान का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता निजाम पाशा ने दलील दी कि अभिनेता के व्यक्तित्व अधिकार पहले से ही उच्च न्यायालय द्वारा संरक्षित हैं। इन विधिक अधिकारों के दायरे में सलमान खान की छवि, उनकी सार्वजनिक पहचान, उनके जैसा दिखने वाला स्वरूप और उनसे जुड़ी अन्य विशिष्ट व्यक्तिगत विशेषताएं शामिल हैं। याचिका में मुख्य रूप से 29 मई को जारी किए गए फिल्म के एक पोस्टर पर आपत्ति जताई गई है। वकील ने अदालत को बताया कि इस पोस्टर में एक व्यक्ति को हूबहू सलमान खान जैसा दिखाया गया है, जिसने कलाई में वही खास फिरोजा ब्रेसलेट पहना हुआ है, जो लंबे समय से सलमान खान की अनूठी पहचान रहा है। याचिकाकर्ता का दावा है कि फिल्म के प्रचार-प्रसार में उनकी इस पहचान का इस्तेमाल बिना किसी पूर्व अनुमति के किया जा रहा है।
कानूनी टीम ने अदालत को यह भी अवगत कराया कि साल 1998 के बहुचर्चित काला हिरण शिकार मामले से जुड़े कुल चार मुकदमों में से तीन में सलमान खान को कानूनी रूप से राहत मिल चुकी है, जबकि केवल एक मामला वर्तमान में अपील के साथ अदालत में लंबित है। इसके बावजूद फिल्म और उससे जुड़े प्रचार प्रसार की सामग्रियों के माध्यम से अभिनेता के नाम को लगातार विवादों के साथ घसीटा जा रहा है। सार्वजनिक रूप से ऐसे बयान दिए जा रहे हैं जो उनकी सामाजिक छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
अभिनेता ने अपनी इस याचिका में निर्माता अमित जानी के साथ-साथ निर्देशक भरत एस. श्रीनाते, अक्षय पांडेय और अन्य संबंधित सहयोगियों को मुख्य पक्षकार बनाया है। सलमान खान की मांग है कि अदालत इस फिल्म के निर्माण, वितरण, डिजिटल या सैटेलाइट रिलीज और किसी भी प्रकार के विज्ञापन पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाए। उनका तर्क है कि उनकी सार्वजनिक छवि का इस तरह उपयोग करना कानूनी और नैतिक रूप से गलत है।
उल्लेखनीय है कि फिल्म ‘काला हिरण : द बैटल फॉर लेगेसी’ साल 1998 के चर्चित शिकार मामले और उसके बाद के घटनाक्रमों पर आधारित बताई जा रही है, जिसका फर्स्ट लुक और ट्रेलर हाल ही में जारी किया गया था। इस कंटेंट के सामने आने के बाद सलमान खान की कानूनी टीम ने पहले ही निर्माताओं को एक कानूनी नोटिस भेजा था और अब यह मामला पूरी तरह से दिल्ली हाईकोर्ट के विचाराधीन है, जहां 19 जून को होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
