नए नियमों के तहत अब किसी भी जहाज को होर्मुज से गुजरने के लिए कम से कम अड़तालीस घंटे पहले ट्रांजिट आवेदन जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही जहाज को पूरी यात्रा के दौरान संबंधित अथॉरिटी से लगातार संपर्क बनाए रखना होगा। यदि किसी भी स्तर पर संपर्क या प्रक्रिया में चूक होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जहाज के मालिक और ऑपरेटर पर होगी। अथॉरिटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी जहाजों को अपनी यात्रा से जुड़ी विस्तृत जानकारी जैसे मार्ग यात्रा समय माल की प्रकृति और संपर्क विवरण पहले से साझा करना होगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद बड़ा है। यह वही मार्ग है जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और दुनिया के प्रमुख तेल और गैस निर्यात का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है। वैश्विक स्तर पर खाड़ी देशों के बड़े हिस्से का ऊर्जा निर्यात इसी मार्ग से होकर गुजरता है। भारत चीन जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर काफी हद तक निर्भर हैं। भारत के लिए भी कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से आता है जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।
पिछले कुछ महीनों में क्षेत्रीय तनाव और सैन्य गतिविधियों के कारण इस जलमार्ग पर आवाजाही बेहद सीमित हो गई थी। कई जहाजों को सुरक्षा कारणों से रोक दिया गया था और कुछ पर हमले का खतरा भी बना हुआ था। युद्ध जैसी स्थितियों के दौरान समुद्र में माइन्स बिछाने जैसी घटनाओं ने भी जहाजों की सुरक्षा को गंभीर चुनौती दी थी। अब जब धीरे धीरे संचालन बहाल किया जा रहा है तो एक साथ बड़ी संख्या में जहाजों के पहुंचने से दबाव बढ़ गया है।
नई व्यवस्था के तहत पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने ट्रांजिट प्रक्रिया को डिजिटल और नियंत्रित प्रणाली से जोड़ दिया है। जहाजों को पहले से ऑनलाइन आवेदन करना होगा और यात्रा से जुड़ी सभी जानकारियां सही समय पर उपलब्ध करानी होंगी। इसके बाद ही उन्हें गुजरने की अनुमति दी जाएगी। अथॉरिटी का कहना है कि यह कदम सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी दुर्घटना की संभावना को कम करने के लिए उठाया गया है।
समझौते के अनुसार शुरुआती साठ दिनों तक किसी भी जहाज से मार्ग उपयोग के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस अवधि में सुरक्षा और पर्यावरण प्रबंधन से जुड़ी सभी लागत ईरान सरकार वहन करेगी ताकि व्यापारिक आवाजाही को सुचारू रूप से दोबारा स्थापित किया जा सके।
हाल के दिनों में कुछ ही जहाज इस मार्ग से गुजर पाए हैं जबकि पहले की तुलना में यह संख्या बहुत कम रही थी। अब जब क्षेत्रीय स्थिति में बदलाव आ रहा है तो होर्मुज फिर से वैश्विक व्यापार का केंद्र बनता दिख रहा है लेकिन इसके साथ ही सुरक्षा और प्रबंधन की चुनौतियां भी लगातार बनी हुई हैं।
