यह मामला कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश देने की मांग की थी कि बीना विधानसभा क्षेत्र की विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता दल-बदल कानून के तहत समाप्त की जाए। उनका तर्क था कि विधायक ने लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के पक्ष में सक्रिय प्रचार किया और पार्टी से जुड़ी गतिविधियों में भाग लिया, जिससे उनकी सदस्यता समाप्त की जानी चाहिए।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई ठोस दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह प्रमाणित हो कि निर्मला सप्रे को आधिकारिक रूप से कांग्रेस से निष्कासित किया गया है। अदालत ने यह भी कहा कि भाजपा की विधिवत सदस्यता ग्रहण करने का भी कोई प्रमाण रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं है। केवल आरोपों या सार्वजनिक गतिविधियों के आधार पर तत्काल कार्रवाई का निर्देश देना उचित नहीं माना जा सकता।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि दल-बदल से संबंधित कार्यवाही पहले से विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित है। ऐसे मामलों में निर्णय लेने का अधिकार संविधान और कानून के तहत विधानसभा अध्यक्ष को प्राप्त है। इसलिए न्यायालय इस स्तर पर विधानसभा अध्यक्ष को किसी निश्चित समय सीमा में निर्णय लेने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। अदालत ने माना कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की कोई ऐसी असाधारण परिस्थिति नहीं है, जो न्यायिक आदेश की आवश्यकता पैदा करे।
पूरा विवाद वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान सामने आया था। कांग्रेस का आरोप था कि निर्मला सप्रे ने भाजपा के पक्ष में चुनाव प्रचार किया और पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मई 2024 में विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। जब इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ तो मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी दावा किया कि सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर मौजूद तस्वीरें एवं वीडियो विधायक के भाजपा से जुड़ाव को दर्शाते हैं। हालांकि अदालत ने माना कि इस प्रकार की सामग्री अपने आप में औपचारिक सदस्यता का पर्याप्त कानूनी प्रमाण नहीं मानी जा सकती। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दल-बदल से जुड़े मामलों में निर्णय तथ्यों और वैधानिक प्रक्रिया के आधार पर ही लिया जाएगा।
निर्मला सप्रे ने वर्ष 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची थीं। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार महेश राय को 6,155 मतों के अंतर से पराजित किया था। हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद फिलहाल उनकी विधानसभा सदस्यता बरकरार रहेगी, जबकि दल-बदल से जुड़ी आगे की प्रक्रिया विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष जारी रहेगी।
