अमेरिकी गृह सुरक्षा सचिव मार्कवेन मुलिन ने हाउस एप्रोप्रिएशन सब कमेटी के समक्ष बताया कि गृह सुरक्षा विभाग तेजी से इमिग्रेशन सिस्टम का आधुनिकीकरण कर रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग ऐसा ऑटोमेटेड प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से आवेदन प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाएगा और मानवीय त्रुटियों को काफी हद तक कम करेगा।
मुलिन के अनुसार पहला एआई आधारित प्लेटफॉर्म अगले 30 दिनों के भीतर शुरू किया जाएगा। शुरुआती चरण में इसका इस्तेमाल डेफर्ड एक्शन फॉर चाइल्डहुड अराइवल्स यानी डीएसीए कार्यक्रम के लंबित मामलों के निपटारे के लिए किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे वर्षों से लंबित आवेदनों का तेजी से समाधान संभव होगा और आगे आने वाले आवेदनों का भी शीघ्र निस्तारण किया जा सकेगा।
सरकार आवेदन प्रक्रिया में होने वाली सामान्य गलतियों को भी समाप्त करना चाहती है। इसी उद्देश्य से ऐसा डिजिटल सिस्टम विकसित किया जा रहा है जिसमें अधूरा या गलत आवेदन जमा ही नहीं किया जा सकेगा। इससे बार बार दस्तावेज लौटने और सुधार के कारण होने वाली देरी कम होगी। अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा तकनीक इस बदलाव को संभव बना सकती है और अब जरूरत केवल उसे व्यापक स्तर पर लागू करने की है।
गृह सुरक्षा विभाग वाणिज्य विभाग के साथ मिलकर एक आधुनिक मोबाइल एप्लीकेशन भी विकसित कर रहा है। इस ऐप के माध्यम से आवेदक अपने दस्तावेज जमा कर सकेंगे आवेदन की स्थिति देख सकेंगे और आवश्यक प्रक्रियाएं डिजिटल माध्यम से पूरी कर पाएंगे। मार्कवेन मुलिन ने बताया कि उन्होंने इस योजना की जानकारी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी दी है और राष्ट्रपति ने इस पहल का समर्थन किया है।
सरकार का मानना है कि डिजिटल तकनीक अपनाने से न केवल आवेदकों को सुविधा मिलेगी बल्कि उद्योग जगत और नियोक्ताओं को भी लाभ होगा। वीजा प्रक्रिया में होने वाली देरी का असर सीधे अर्थव्यवस्था और श्रम बाजार पर पड़ता है। इसलिए सरकार तकनीक के जरिए दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है।
मुलिन ने बताया कि एच टू ए कृषि वीजा की प्रोसेसिंग अवधि पहले ही घटाकर लगभग 15 दिन कर दी गई है। अब सरकार डेयरी फार्मिंग जैसे क्षेत्रों में श्रमिकों की कमी दूर करने के लिए भी नए विकल्पों पर विचार कर रही है क्योंकि वर्तमान वीजा नियम वहां की जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछली सरकार के दौरान स्वीकृत कई इमिग्रेशन मामलों की दोबारा जांच की जा रही है ताकि सुरक्षा मानकों को और मजबूत बनाया जा सके। इसके लिए अतिरिक्त स्क्रीनिंग सिस्टम भी विकसित किए गए हैं जिससे केवल पात्र और नियमों के अनुरूप आवेदकों को ही मंजूरी मिले।
भारत अमेरिका में पढ़ाई रोजगार और उच्च कौशल वाले पेशेवरों के लिए सबसे बड़े स्रोत देशों में शामिल है। ऐसे में यदि एआई आधारित वीजा प्रोसेसिंग सफल होती है तो हजारों भारतीय छात्रों पेशेवरों और कानूनी आवेदकों को तेज सेवा और बेहतर डिजिटल अनुभव का लाभ मिल सकता है। हालांकि अंतिम मंजूरी मौजूदा अमेरिकी इमिग्रेशन कानूनों और सुरक्षा मानकों के अनुसार ही दी जाएगी।
