राजीव कुमार गुप्ता का जन्म एक साधारण ग्रामीण परिवार में हुआ जहां आर्थिक संसाधन सीमित थे। उनके पिता किराना दुकान चलाते थे और बचपन से ही राजीव परिवार की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाने लगे थे। कई बार ऐसे हालात भी आए जब उनकी जेब में खर्च करने तक के पैसे नहीं होते थे लेकिन उन्होंने कठिनाइयों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने इन्हीं परिस्थितियों से संघर्ष करना सीखा और आगे बढ़ने का संकल्प लिया।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके मन में ऐसा कारोबार शुरू करने का विचार आया जो भारतीय परिवारों को बेहतर गुणवत्ता वाले और किफायती घरेलू उपकरण उपलब्ध करा सके। उस समय देश का उपभोक्ता बाजार तेजी से बदल रहा था और इसी अवसर को पहचानते हुए उन्होंने वर्ष 1992 में गाजियाबाद से थर्मोकूल की शुरुआत की।
कारोबार शुरू करना आसान नहीं था क्योंकि बाजार में पहले से कई बड़े और स्थापित ब्रांड मौजूद थे। उनके पास मजबूत डीलर नेटवर्क बड़ा निवेश और व्यापक बाजार था जबकि राजीव के पास सीमित पूंजी और सीमित संसाधन थे। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने उत्पादों की गुणवत्ता तथा ग्राहकों के विश्वास को सबसे बड़ी ताकत बनाया। उनका मानना था कि यदि ग्राहक को उचित कीमत पर भरोसेमंद उत्पाद मिलेगा तो वह स्वयं ब्रांड को आगे बढ़ाएगा।
शुरुआत एयर कूलर और पंखों के निर्माण से हुई लेकिन समय के साथ कंपनी ने अपने उत्पादों का लगातार विस्तार किया। आज थर्मोकूल वॉशिंग मशीन गीजर रेफ्रिजरेटर एलईडी टीवी और कई तरह के किचन अप्लायंसेज का निर्माण कर रही है। कंपनी ने उत्तर प्रदेश बिहार राजस्थान और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों के शहरी और अर्ध शहरी बाजारों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है।
आज कंपनी का सालाना कारोबार लगभग 285 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। यह उपलब्धि केवल व्यावसायिक सफलता नहीं बल्कि उस सोच का परिणाम है जिसमें मेहनत ईमानदारी गुणवत्ता और ग्राहकों के विश्वास को सबसे अधिक महत्व दिया गया। कंपनी आने वाले वर्षों में भारतीय होम अप्लायंसेज बाजार में अपनी हिस्सेदारी को और बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
राजीव कुमार गुप्ता की सफलता उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं। उनका सफर यह संदेश देता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों यदि संकल्प मजबूत हो और मेहनत लगातार जारी रहे तो सफलता की नई कहानी लिखी जा सकती है।
