शिवपुरी। करीब पांच वर्ष पुराने पत्नी की हत्या के मामले में न्यायालय ने आरोपी पति को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं, साक्ष्यों के अभाव में न्यायालय ने आरोपी को दहेज प्रताड़ना के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। शासन की ओर से मामले की पैरवी अपर लोक अभियोजक अमित कुमार वर्मा ने की।
अभियोजन के अनुसार, अक्टूबर 2021 की सुबह लगभग 4 बजे फरियादी वीरेंद्र सिंह को सूचना मिली कि उनकी पुत्री कुमकुम की तबीयत खराब है। सूचना मिलने पर वह अपने भाई, बेटे और पत्नी के साथ ग्राम रिछाई पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि कुमकुम कमरे के तिवारे में मृत अवस्था में पड़ी थी। उसके सिर, गले, कान, पीठ, पेट सहित शरीर के कई हिस्सों पर चोट के निशान थे।
इसके बाद वीरेंद्र सिंह ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनकी पुत्री कुमकुम ने पूर्व में उन्हें बताया था कि उसका पति मोनू उर्फ देवेंद्र (33 वर्ष), निवासी ग्राम रिछाई, शराब पीकर घर आता था, उसके साथ मारपीट करता था और दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित करता था।
पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध हत्या, दहेज मृत्यु एवं दहेज प्रताड़ना सहित भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 304-बी एवं 498-ए के तहत मामला दर्ज कर विवेचना पूरी करने के बाद न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया।
प्रकरण की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों एवं गवाहों के बयान के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को हत्या (धारा 302) का दोषी माना और उसे आजीवन कारावास तथा 5,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। हालांकि, न्यायालय ने दहेज प्रताड़ना एवं दहेज मृत्यु से संबंधित आरोपों में पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए जाने पर आरोपी को उन आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
