नई दिल्ली। सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाने वाली आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी (हरिशयनी) एकादशी आज देशभर में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यता है कि आज के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में चार माह की योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी के साथ चातुर्मास का शुभारंभ होता है और विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर देवउठनी एकादशी तक विराम लग जाता है।
सुबह से ही देशभर के विष्णु एवं लक्ष्मी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। भक्त पवित्र नदियों में स्नान कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर व्रत रख रहे हैं। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत एवं पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
आज ही रखें व्रत, कल होगा पारण
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष एकादशी तिथि का समापन 25 जुलाई को सुबह 11:36 बजे हो रहा है। उदयातिथि के आधार पर आज ही व्रत रखना श्रेष्ठ माना गया है।
व्रत पारण: 26 जुलाई (रविवार) सुबह 5:39 बजे से 8:22 बजे तक।
शास्त्रों के अनुसार हरिवासर समाप्त होने के बाद ही पारण करना शुभ माना गया है।
चातुर्मास: साधना, संयम और भक्ति का काल
देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होने वाला चातुर्मास देवउठनी एकादशी तक चलता है। इन चार महीनों को जप, तप, ध्यान, दान और आत्म-संयम के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस अवधि में अनेक श्रद्धालु एक समय भोजन, सात्विक जीवन, भूमि पर शयन तथा धार्मिक अनुष्ठानों का संकल्प लेते हैं।
पौराणिक महत्व
पुराणों के अनुसार, शंखचूड़ नामक असुर का वध करने के बाद भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले गए थे। एक अन्य मान्यता के अनुसार, राजा बलि के दान से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का राज्य प्रदान किया और स्वयं उनके द्वारपाल बने। माता लक्ष्मी के अनुरोध पर भगवान आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक पाताल लोक में निवास करते हैं, जिसे उनकी योगनिद्रा कहा जाता है।
शाम को होगा शयन उत्सव
देवशयनी एकादशी के अवसर पर आज शाम घरों और मंदिरों में भगवान विष्णु के शयन उत्सव का आयोजन किया जाएगा। विशेष पूजा-अर्चना के बाद भगवान को शयन कराया जाएगा और श्रद्धालु सुख-समृद्धि, आरोग्य एवं कल्याण की कामना करते हुए चातुर्मास के नियमों का पालन करने का संकल्प लेंगे।
