उमरिया, 28 अगस्त। जिले के विश्वप्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में शुक्रवार को रक्षाबंधन का पर्व अनूठे और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाले अंदाज में मनाया गया। टाइगर रिजर्व में पदस्थ महिला वनकर्मियों ने पेड़ों को अपना भाई मानते हुए पूरे रीति-रिवाज के साथ रक्षा सूत्र बांधा और उनके संरक्षण का संकल्प लिया।
महिला वनकर्मियों ने वृक्षों को तिलक लगाया, आरती उतारी और उनकी कलाई के प्रतीक स्वरूप रक्षा सूत्र बांधकर प्रकृति के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। इस दौरान उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भाई अपनी बहन की रक्षा करता है, उसी प्रकार वृक्ष भी मानव जीवन को प्राणवायु, छाया और आश्रय प्रदान कर जीवन की रक्षा करते हैं।
वन संरक्षण को संस्कृति से जोड़ने की पहल
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने महिला वनकर्मियों की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि वन एवं वृक्षों के महत्व को त्योहारों और भारतीय संस्कृति से जोड़कर जनजागरूकता बढ़ाई जा सकती है। इससे आमजन में वन एवं वन्यजीवों के प्रति संवेदना विकसित होगी और वन संरक्षण के प्रयासों को सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन पर पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधना इस बात का प्रतीक है कि मानव जीवन के लिए वनों और वृक्षों के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। मानव सभ्यता का अस्तित्व और विकास वनों एवं वन्यजीवों के सुरक्षित रहने पर ही निर्भर है।
हर रक्षाबंधन एक पौधा लगाने की अपील
बांधवगढ़ प्रबंधन ने आमजन से अपील की कि जिस प्रकार वन और वृक्ष प्राणवायु प्रदान कर मानव जीवन की रक्षा करते हैं, उसी भावना के साथ प्रत्येक व्यक्ति हर वर्ष रक्षाबंधन के अवसर पर कम से कम एक पौधा लगाए, उसे रक्षा सूत्र बांधे और जीवनभर उसकी देखभाल एवं सुरक्षा का संकल्प ले।
रक्षाबंधन के इस अनूठे आयोजन ने भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को प्रकृति संरक्षण से जोड़ते हुए समाज को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भावनात्मक संदेश दिया।
