नगर निगम का दावा है कि अब तक करीब 190 प्रतिष्ठानों ने स्वेच्छा से अपनी व्यावसायिक गतिविधियां बंद कर दी हैं। बंद किए गए प्रतिष्ठानों के बाहर यह सूचना भी लगाई गई है कि नगर निगम के आदेश के अनुसार भवन में कमर्शियल गतिविधियां बंद कर दी गई हैं। हालांकि कई जगह इस दावे और वास्तविक स्थिति में अंतर दिखाई दिया। अरेरा कॉलोनी में एक तीन मंजिला भवन के ग्राउंड फ्लोर पर दो दुकानों के शटर बंद मिले और उन पर बंदी का पोस्टर लगा था लेकिन उसी के पास एक अन्य दुकान खुली हुई दिखाई दी। इसी तरह एक टेलरिंग शॉप के बाहर कारोबार बंद करने का बैनर लगा था लेकिन भवन का गेट खुला मिला जिससे कार्रवाई को लेकर सवाल उठे।
एक अन्य मामला पहले होटल के रूप में संचालित भवन का है जिसे कार्रवाई के बाद बंद कराया गया। इसके बाद वहां निज निवास का बोर्ड लगा दिया गया। हालांकि स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि कार्रवाई के बाद संबंधित भवनों की वास्तविक स्थिति की निगरानी कितनी प्रभावी ढंग से की जा रही है। यही वजह है कि नगर निगम की सीलिंग और नोटिस कार्रवाई अब व्यापारियों के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी बहस का विषय बन गई है।
शहर के 10 नंबर मार्केट में भी कार्रवाई को लेकर भेदभाव के आरोप सामने आए हैं। कुछ प्रतिष्ठानों को नोटिस देकर बंद कराया गया जबकि आसपास कई अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चलती दिखाई दीं। सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाने वाले पक्ष का कहना है कि कार्रवाई छोटे कारोबारियों तक सीमित दिखाई दे रही है जबकि बड़े प्रतिष्ठानों के खिलाफ समान स्तर पर कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी साक्ष्यों के साथ अपनी बात रखने की तैयारी की जा रही है।
कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों का गुस्सा भी लगातार बढ़ रहा है। बीते दिनों सीलिंग कार्रवाई के विरोध में हजारों व्यापारियों ने प्रदर्शन किया और कई दुकानों को बंद रखा गया। विरोध प्रदर्शन के दौरान शहर के प्रमुख इलाकों में यातायात भी प्रभावित हुआ। इसके बाद कोलार रोड क्षेत्र में भी व्यापारी संगठनों के आह्वान पर बाजार बंद रखा गया। व्यापारियों का कहना है कि अचानक की जा रही कार्रवाई से उनका कारोबार और रोजी रोजगार प्रभावित हो रहा है।
दरअसल यह पूरा मामला आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण से जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद नगर निगम पर कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का दबाव है। इसी कारण शहर में नोटिस और सीलिंग की प्रक्रिया तेज की गई है। रहवासियों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में बढ़ती कमर्शियल गतिविधियों से ट्रैफिक शोर भीड़ और सुरक्षा संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर निगम की कार्रवाई सभी प्रतिष्ठानों पर समान रूप से होगी या फिर बंदी के पोस्टर और खुली दुकानों का विरोधाभास इस पूरे अभियान पर सवाल खड़े करता रहेगा।
