नई टोल व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि यहां पारंपरिक बूम बैरियर नहीं होगा। अभी तक टोल प्लाजा पर पहुंचते ही वाहन को धीमा करना पड़ता है और फास्टैग स्कैन होने के बाद बैरियर खुलने का इंतजार करना पड़ता है। लेकिन बैरियर-लेस सिस्टम में यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से होगी। टोल लेन पर लगाए गए आधुनिक फास्टैग रीडर वाहन की पहचान करेंगे जबकि कैमरे और सेंसर वाहन का नंबर और उसकी श्रेणी का पता लगाएंगे। इसके बाद वाहन की कैटेगरी के अनुसार टोल शुल्क तय होगा और फास्टैग खाते से राशि स्वतः कट जाएगी।
इस तकनीक से सबसे बड़ा फायदा वाहन चालकों को समय की बचत के रूप में मिलेगा। टोल प्लाजा पर लंबी कतारों और बार-बार रुकने की समस्या कम होगी। वाहनों को ब्रेक लगाने और फिर दोबारा गति बढ़ाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी जिससे पेट्रोल और डीजल की खपत में कमी आने की संभावना है। लगातार चलने वाले ट्रैफिक से सड़क पर जाम की स्थिति भी कम होगी और यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुगम बन सकेगी।
यदि किसी वाहन के फास्टैग में पर्याप्त राशि नहीं है या वाहन नंबर की जानकारी में कोई तकनीकी समस्या सामने आती है तो सिस्टम इसके लिए भी डिजिटल विकल्प देगा। ऐसी स्थिति में वाहन मालिक को ई-चालान भेजा जाएगा और उसे तय समय के भीतर टोल राशि जमा करनी होगी। तीन दिन के अंदर भुगतान नहीं करने पर जुर्माने के साथ राशि वसूली जा सकती है।
बैरियर-लेस टोलिंग व्यवस्था से टोल संचालन में कर्मचारियों पर निर्भरता भी कम होगी और पूरी प्रक्रिया अधिक डिजिटल और स्वचालित बनेगी। यूरोप और जर्मनी समेत कई देशों में ऐसी तकनीक का उपयोग पहले से किया जा रहा है और अब मध्यप्रदेश भी आधुनिक टोल प्रबंधन की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। फंदा टोल पर शुरू हुआ यह प्रयोग सफल रहा तो आने वाले समय में राज्य के अन्य प्रमुख मार्गों पर भी बिना रुके डिजिटल टोल भुगतान की व्यवस्था देखने को मिल सकती है।
