जिउतिया व्रत से पहले मड़ुआ की रोटी खाने की दोनों गांवों में पुरानी परंपरा बताई गई है। संतान की मंगलकामना के लिए माताएं चौबीस घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं, लेकिन इस बार व्रत से एक दिन पहले रोटी खाने के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं बीमार पड़ गईं। एक साथ 50 से अधिक मरीजों के अस्पताल पहुंचने से वहां भी अफरातफरी की स्थिति बन गई। एक बेड पर दो मरीजों को लेटाकर उपचार किया गया। स्ट्रेचर कम पड़ने पर कुछ मरीजों को गोद में उठाकर ले जाया गया। देर शाम तक अस्पताल में मरीजों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। प्रशासन के निर्देश पर दोनों गांवों में दो एम्बुलेंस के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात की गई।
चौकन निवासी 35 वर्षीय सुनीता भी मड़ुआ की रोटी खाने के बाद जिला अस्पताल में भर्ती हैं। दूसरी ओर उनका छह माह का बेटा भूख से बिलखता रहा। जिस बेटे के स्वास्थ्य के लिए मां जिउतिया का निर्जला व्रत रखने वाली थीं, वह अपनी तबीयत खराब होने के कारण उसे दूध पिलाने की स्थिति में नहीं थीं। बच्चा अपने पिता राजकुमार की गोद से मां को देखकर रो रहा था। डॉक्टरों की टीम के पूछने पर पिता ने बताया कि बच्चा अब तक केवल मां का दूध ही पीता है। उधर, देर शाम जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि दोनों गांवों के 49 लोग अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें 43 जिला अस्पताल, तीन बांसडीह सीएचसी और तीन निजी अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें 37 महिलाएं, 12 पुरुष और 10 बच्चे शामिल बताए गए। सभी की हालत खतरे से बाहर है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि सभी लोगों को मड़ुआ का आटा एक ही दुकान से मिला था। चौकन गांव के किसान रिंकू सिंह ने पिछले वर्ष बांसडीह कचहरी स्थित सरकारी बीज भंडार से खेत में बोने के लिए मिले मड़ुआ के बीज को घर में रखा था। जीवित्पुत्रिका व्रत के लिए मड़ुआ का आटा नहीं मिलने की बात सामने आने पर उन्होंने करीब दो किलो बीज को आसचौरा में छितेश्वर वर्मा की चक्की पर पिसवा दिया। गुरुवार रात आटा तैयार हुआ। उसमें से कुछ आटा चक्की संचालक ने भी रख लिया। चक्की से लौटते समय सोनू की मां ने रिंकू से व्रत के लिए आटा मांग लिया। बाद में वही आटा दुकान पर रखा गया और गांव की कुछ महिलाओं को बांटा गया।
घटना की सूचना मिलने पर जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह, एसपी ओमवीर सिंह और सीएमओ डॉ. अभय नारायण राय समेत प्रशासनिक टीम जिला अस्पताल पहुंची और इलाज की व्यवस्था का जायजा लिया। इसके बाद अधिकारियों ने प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के सहायक आयुक्त (द्वितीय) जेपी सिंह के नेतृत्व में टीम ने दुकानदार सोनू वर्मा और किसान रिंकू सिंह से पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में आटा मड़ुआ के बीज से तैयार होने की बात सामने आई है। खाद्य विभाग ने आटा और उससे बनी रोटी के नमूने जांच के लिए लखनऊ भेजे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आटे में मौजूद पदार्थ और बीमारी के कारण की स्थिति स्पष्ट होगी।
