उन्होंने कहा कि ऐसे समय में आर्थिक झटके व्यापक आर्थिक प्रणालियों, वितरण तंत्र और राज्य की क्षमता की परीक्षा लेते हैं। वित्त मंत्री के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी 7.8 प्रतिशत बढ़ी, अगस्त 2026 में सीपीआई मुद्रास्फीति करीब 4.8 प्रतिशत रही और पहली तिमाही में चालू खाते का घाटा जीडीपी का 0.5 प्रतिशत रहा।
सीतारमण ने कहा कि 2014 से सरकार ने सतत विकास के लिए जरूरी क्षमताओं को मजबूत करने पर काम किया है। इनमें राज्य की प्रतिक्रिया देने की क्षमता, अर्थव्यवस्था की उत्पादन क्षमता और नागरिकों तथा उद्यमों की विकास में भागीदारी शामिल है। उन्होंने पहली बुनियाद परिवारों के स्तर पर लचीलेपन को मजबूत करना बताया। उनके अनुसार सरकारी खर्च और योजनाओं को लोगों के जीवन में ठोस सुधार में बदलने, पारदर्शी तंत्र, निगरानी और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन से परिवारों की असुरक्षा के अलग-अलग स्रोतों को कम करने में मदद मिली।
जन धन-आधार-मोबाइल यानी जेएएम और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर ने लाभार्थियों तक सीधे सहायता पहुंचाने वाली व्यवस्थाओं को मजबूत किया। पीएम आवास योजना, स्वच्छ भारत, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत और पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत किए गए कार्यों का भी उन्होंने उल्लेख किया।
वित्त मंत्री ने दूसरी बुनियाद को आर्थिक अवसरों को उत्पादक गतिविधियों में बदलने की क्षमता बताया। उन्होंने कहा कि वित्त तक पहुंच इसका महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। पीएम मुद्रा योजना के तहत 52 करोड़ से अधिक बिना गारंटी वाले ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जिससे स्वरोजगार और छोटे उद्यमों को समर्थन मिला। पीएम स्वनिधि योजना से रेहड़ी-पटरी वालों को सहायता मिलने का भी उन्होंने उल्लेख किया। सीतारमण के अनुसार, बैंकिंग क्षेत्र में पुनर्पूंजीकरण, संकट वाली परिसंपत्तियों के समाधान, बेहतर प्रशासन और जोखिम प्रबंधन ढांचे के जरिए वित्तीय प्रणाली को मजबूत किया गया है।
अगस्त 2026 तक के एक वर्ष में गैर-खाद्य ऋण में 18.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना ने कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने, परिचालन और रोजगार बनाए रखने तथा व्यवधान के समय नकदी की कमी से निपटने में मदद की।
तीसरी बुनियाद के तौर पर सीतारमण ने उस बुनियादी ढांचे को बताया, जो लोगों, कारखानों और बाजारों को जोड़ता है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में अकेले पूंजीगत व्यय के लिए 12.22 लाख करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। उनके अनुसार प्रभावी पूंजीगत व्यय 17.15 लाख करोड़ रुपये है, जो जीडीपी का 4.4 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि 2014 से लगातार किए गए निवेश के संचयी परिणाम दिखाई दे रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार करीब 61 प्रतिशत हुआ है, परिचालन रेलवे मार्ग दोगुने से अधिक हो गए हैं और प्रमुख बंदरगाहों की माल ढुलाई क्षमता में करीब 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
चौथी बुनियाद के रूप में उन्होंने मजबूत सुधारवादी सोच वाले नेतृत्व का उल्लेख किया। सीतारमण ने कहा कि सरकार ने जीएसटी, दिवाला और दिवालियापन संहिता, चार श्रम संहिताओं और जन विश्वास अधिनियमों के जरिए राष्ट्रीय स्तर के ढांचे को आगे बढ़ाया है। उन्होंने परिचालन हवाई अड्डों की संख्या दोगुने से अधिक होने और प्रमुख बंदरगाहों की माल ढुलाई क्षमता में करीब 60 प्रतिशत वृद्धि का भी उल्लेख किया।
