शशि थरूर ने कहा कि ऐसे समय में विरोध प्रदर्शन करना उन नागरिकों के साथ खड़े होने जैसा है, जिनके संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया जा रहा है। उन्होंने राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने की तस्वीरों पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार के रुख को शर्मनाक बताया। थरूर ने यह भी कहा कि वह प्रदर्शन स्थल पर मौजूद नहीं थे, लेकिन उनका समर्थन विपक्षी आंदोलन के साथ है। उन्होंने अपने संदेश में न्याय मिलने की उम्मीद भी जताई।
प्रदर्शन में खुद शामिल नहीं होने को लेकर शशि थरूर ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि वह जर्मनी में एक कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने के लिए गए हुए हैं। उनके अनुसार, करीब चार महीने पहले बर्लिन में आयोजित होने वाली इस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने का वादा किया था। इसी प्रतिबद्धता के कारण वह दिल्ली के प्रदर्शन में नहीं पहुंच सके। उन्होंने कहा कि वह दूर रहकर ही अपना समर्थन दे सकते हैं, लेकिन उनकी भावनात्मक मौजूदगी प्रदर्शन कर रहे नेताओं के साथ है।
इससे पहले मंगलवार को इंडिया गठबंधन के सांसदों ने संसद भवन से निर्वाचन सदन की ओर मार्च निकाला था। पुलिस ने संसद मार्ग पर नीति आयोग और आकाशवाणी भवन के सामने विपक्षी सांसदों को रोक दिया। इसके बाद कई सांसद सड़क पर धरने पर बैठ गए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाद्रा और कांग्रेस तथा सहयोगी दलों के कुछ नेता आकाशवाणी भवन परिसर में बरगद के पेड़ के नीचे धरने पर बैठ गए। यह धरना दोपहर करीब 12:20 बजे शुरू हुआ और कई घंटे तक जारी रहा।
धरने के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मतदाता सूची से जुड़े आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के सांसद निर्वाचन आयुक्तों से मिलना चाहते हैं। राहुल गांधी के मुताबिक, करीब 300 सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों निर्वाचन आयुक्तों से मिलने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दी गई। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, मंगलवार रात करीब आठ बजे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाद्रा और अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने प्रदर्शन स्थल से करीब 260 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी, जिनमें 10 सांसद भी शामिल थे। हिरासत में लिए गए नेताओं में कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा, के. सुरेश, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और इमरान प्रतापगढ़ी के अलावा तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओब्रायन और समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्ला नदवी भी शामिल थे। नेताओं को किंग्सवे कैंप ले जाया गया और करीब दो घंटे बाद रात 10 बजे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं को रिहा कर दिया गया।
