आरबीआई के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में CPI महंगाई 4.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। तीसरी तिमाही में इसके बढ़कर 6 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। वहीं, वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही के लिए महंगाई का अनुमान 5.6 प्रतिशत रखा गया है। चालू वित्त वर्ष के लिए कोर मुद्रास्फीति का अनुमान 4.4 प्रतिशत है।
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि अगस्त में CPI महंगाई बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई, जबकि इससे पहले यह 4.5 प्रतिशत थी। इस बढ़ोतरी में खाद्य और ईंधन कीमतों में तेजी की अहम भूमिका रही। उन्होंने कहा कि कोर मुद्रास्फीति में भी वृद्धि हुई है। इससे संकेत मिलता है कि कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव अब अर्थव्यवस्था के अधिक क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है।
केंद्रीय बैंक के मुताबिक खाद्य महंगाई अब केवल कुछ चुनिंदा वस्तुओं तक सीमित नहीं रही है। चीनी और प्याज जैसी वस्तुओं की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। अगस्त में ईंधन महंगाई बढ़ने के पीछे प्रतिकूल आधार प्रभाव भी एक कारण रहा। आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में कोर मुद्रास्फीति 4.2 प्रतिशत रही। वहीं, कीमती धातुओं को अलग रखने पर कोर मुद्रास्फीति 2.9 प्रतिशत दर्ज की गई।
आरबीआई ने आने वाले महीनों में आपूर्ति पक्ष से जुड़े जोखिमों के बने रहने की आशंका जताई है। कमजोर मानसून, जारी अल नीनो परिस्थितियां, ऊंची ऊर्जा कीमतें और अन्य कमोडिटी की मजबूत कीमतें महंगाई पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं। केंद्रीय बैंक ने इस स्थिति को महंगाई के मौजूदा परिदृश्य के लिए प्रमुख जोखिमों में शामिल किया है।
आरबीआई के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि CPI बास्केट में शामिल उन वस्तुओं का हिस्सा, जिनकी महंगाई दर 4 प्रतिशत से अधिक है, अगस्त में बढ़कर करीब 37 प्रतिशत हो गया। इससे यह संकेत मिलता है कि कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव अधिक वस्तुओं तक फैल रहा है। केंद्रीय बैंक ने इसी व्यापक दबाव को महंगाई के बदलते परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना है।
संजय मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई और उसका आउटलुक पिछले वर्ष की तुलना में अब उतना अनुकूल नहीं है। अगले तीन तिमाहियों में औसत CPI मुद्रास्फीति करीब 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि कोर मुद्रास्फीति लगभग 4.4 प्रतिशत रह सकती है। इस आकलन के बीच मौद्रिक नीति को लेकर भी बदलाव किया गया है।
आरबीआई ने रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है। गवर्नर के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में नीतिगत ब्याज दरों का पुनर्संतुलन आवश्यक हो गया था। महंगाई के बढ़ते दबाव, खाद्य और ऊर्जा कीमतों में तेजी तथा आपूर्ति संबंधी जोखिमों को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने मुद्रास्फीति अनुमान को 5.2 प्रतिशत पर रखा है।
