अपने वीडियो में मुफ्ती गुफरान खान नदवी ने गरबा में मुस्लिम युवाओं की भागीदारी के सवाल पर इसे हराम बताया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में होने वाले गरबा या हिंदू धार्मिक रस्म में मुस्लिम लड़कों का शामिल होना उचित नहीं है। उनका कहना है कि कुछ मुस्लिम युवक अपने दोस्तों के साथ गरबा में जाना सामान्य बात समझते हैं लेकिन उन्हें इससे बचना चाहिए। उन्होंने मुस्लिम समाज के युवाओं से अपनी धार्मिक पहचान और परंपराओं के प्रति जागरूक रहने की बात कही।
मुफ्ती ने कहा कि मुस्लिम समाज की अपनी धार्मिक परंपराएं और रीति रिवाज हैं और युवाओं को इन्हीं के प्रति जागरूक रहना चाहिए। उन्होंने दूसरी कौम की धार्मिक रस्मों के अनुकरण को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि इस तरह का अनुकरण मुस्लिम समाज के लिए फितने का कारण बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमानों का अपना धर्म और उसकी परंपराएं उनके लिए पर्याप्त हैं और उन्हें दूसरे धर्मों के त्योहारों की ओर आकर्षित होने की जरूरत नहीं है।
मुफ्ती गुफरान खान नदवी ने अपने बयान में मस्जिद और नमाज का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले मस्जिद के गेट तक भी नहीं आते थे वे अब वहां तक पहुंच रहे हैं। उन्होंने इस स्थिति को मुस्लिम धार्मिक परंपराओं के प्रति बढ़ती दिलचस्पी से जोड़ते हुए कहा कि अगर कोई मस्जिद के गेट तक आया है तो आगे चलकर अंदर भी आ सकता है। उन्होंने लोगों को नमाज और धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का संदेश दिया।
गरबा में मुस्लिम युवाओं की भागीदारी को लेकर यह अपील केवल मुफ्ती की ओर से ही नहीं आई है। ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी भी मुस्लिम युवाओं और समाज के लोगों से गरबा में जाने से परहेज करने की अपील कर चुकी है। कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेख इस्माइल खान ने 6 अक्टूबर को जारी अपील में कहा था कि इसका उद्देश्य किसी धर्म या धार्मिक आयोजन का विरोध करना नहीं बल्कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखना और विवाद की स्थिति से बचना है।
कमेटी की ओर से कहा गया है कि हाल के दिनों में गरबा आयोजनों में मुस्लिम युवाओं की मौजूदगी को लेकर सार्वजनिक तौर पर आपत्तियां सामने आई हैं। इसी को देखते हुए कमेटी ने अपने पदाधिकारियों को प्रदेश संभाग और जिला स्तर पर अभियान चलाने के लिए कहा है। इसके तहत स्थानीय उलेमा और सामाजिक संगठनों से संपर्क कर मुस्लिम युवाओं को गरबा आयोजनों से दूर रहने की अपील की जाएगी।
कमेटी के मुताबिक जिला प्रशासन को भी इस पहल की जानकारी दी जाएगी। उसका कहना है कि किसी धार्मिक आयोजन का विरोध करना उद्देश्य नहीं है बल्कि विवाद से बचना और शांति बनाए रखना प्राथमिकता है। गरबा और मुस्लिम युवाओं की भागीदारी को लेकर सामने आए इन बयानों के बीच अब यह मुद्दा धार्मिक पहचान सामाजिक सौहार्द और सार्वजनिक आयोजनों में भागीदारी को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।
