दरअसल भारतीय रिजर्व बैंक ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी कर दिया। करीब चार साल में यह पहली बड़ी दर बढ़ोतरी है। इसके साथ ही RBI ने अपनी नीति का रुख न्यूट्रल से बदलकर कैलिब्रेटेड टाइटनिंग कर दिया। बाजार के लिए यह संकेत महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्याज दरों में बढ़ोतरी से कंपनियों की उधारी लागत प्रभावित हो सकती है और ब्याज दर पर निर्भर सेक्टरों में दबाव बढ़ सकता है।
7 अक्टूबर को बाजार में ज्यादातर प्रमुख सेक्टरों में कमजोरी देखने को मिली। मेटल शेयरों पर खास दबाव रहा और निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 2.3 फीसदी नीचे रहा। रियल एस्टेट और ऑटो जैसे ब्याज दर से प्रभावित होने वाले सेक्टर भी दबाव में रहे। दूसरी तरफ बैंकिंग शेयरों में कुछ मजबूती देखने को मिली। RBI के फैसले के बाद बैंक निफ्टी ने दिन के निचले स्तर से करीब 600 अंक की रिकवरी भी दिखाई। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में पूरी तरह से बिकवाली का माहौल नहीं है बल्कि अलग अलग सेक्टरों में निवेशकों की रणनीति अलग रह सकती है।
शेयरों की बात करें तो टाइटन में करीब 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह निफ्टी के प्रमुख कमजोर शेयरों में रहा। अदाणी एंटरप्राइजेज और हिंदाल्को इंडस्ट्रीज में भी दबाव दिखाई दिया। इसके उलट कोटक महिंद्रा बैंक में करीब 1.9 फीसदी की तेजी रही। ऐसे में 8 अक्टूबर को निवेशकों की नजर उन शेयरों पर रह सकती है जिनमें मजबूत कारोबार और बेहतर तिमाही प्रदर्शन की उम्मीद है।
बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमत भी बड़ा संकेत बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। महंगे तेल का असर भारत के आयात बिल के साथ महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। इसके अलावा रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही है। 7 अक्टूबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने करीब 2961 करोड़ रुपये के शेयर बेचे जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 5088 करोड़ रुपये की खरीदारी की।
कुल मिलाकर 8 अक्टूबर का कारोबार बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। RBI की सख्त नीति कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें कमजोर रुपया और वैश्विक बाजारों के संकेत मिलकर बाजार में उतार चढ़ाव बढ़ा सकते हैं। वहीं मजबूत आर्थिक विकास का अनुमान बाजार के लिए सकारात्मक पक्ष है। RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए GDP वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.1 फीसदी किया है। ऐसे में निवेशकों को बाजार की तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय जोखिम और कंपनी के प्रदर्शन को ध्यान में रखना जरूरी होगा।
