रणबीर पुष्प ने नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के साथ काम करने के अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया था कि दोनों के बीच अच्छी दोस्ती थी। सेट पर दोनों की आपसी समझ भी काफी मजबूत थी। वे अपने किरदारों और दृश्यों को लेकर आपस में चर्चा करते थे और उनकी यह समझ पर्दे पर भी दिखाई देती थी। रणबीर के मुताबिक उन्होंने दोनों को करीब जरूर देखा लेकिन उनके रिश्ते को उन्होंने कभी रोमांटिक नजरिए से नहीं देखा था।
जब रणबीर से सीधे पूछा गया कि क्या नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के बीच दोस्ती से आगे भी कोई रिश्ता था तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्हें ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ। उन्होंने माना कि दोनों के बीच करीबी और गहरी समझ थी लेकिन इसे प्यार या रोमांस कहना उनके लिए सही नहीं था। रणबीर ने बताया कि दोनों कलाकार साथ काम करते समय अपने सीन को लेकर बातचीत करते थे और इसी वजह से उनकी स्क्रीन केमिस्ट्री भी काफी प्रभावी नजर आती थी।
रणबीर ने यह भी बताया कि उस समय बाद में अखबारों और मीडिया में नाना और मनीषा के रिश्ते को लेकर कई तरह की बातें सामने आई थीं। उन्होंने उन खबरों को पढ़ा भी था लेकिन अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने कभी दोनों के रिश्ते को उस नजरिए से नहीं देखा। उनका कहना था कि सेट पर उनका मुख्य ध्यान अपने काम पर रहता था। वह काम से जुड़े मामलों पर ध्यान देते थे और कलाकारों के निजी रिश्तों को लेकर ज्यादा गौर नहीं करते थे।
फिल्म अग्नि साक्षी साल 1996 में रिलीज हुई थी। पार्थो घोष के निर्देशन में बनी इस साइकोलॉजिकल थ्रिलर में नाना पाटेकर मनीषा कोइराला और जैकी श्रॉफ प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म में नाना और मनीषा की जोड़ी को दर्शकों ने देखा और इसी दौरान दोनों की ऑफस्क्रीन बॉन्डिंग को लेकर भी चर्चाएं तेज हुई थीं। वर्षों बाद भी दोनों के कथित रिश्ते का किस्सा बॉलीवुड की चर्चित कहानियों में शामिल रहा है।
हालांकि रणबीर पुष्प का बयान यह साफ करता है कि उन्होंने दोनों के बीच मजबूत दोस्ती और अच्छी अंडरस्टैंडिंग जरूर देखी थी लेकिन उनके सामने ऐसा कोई अनुभव नहीं आया जिससे वह इसे रोमांटिक रिश्ता मान सकें। ऐसे में नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के बीच प्रेम संबंध की पुरानी चर्चाएं आज भी अफवाहों और अटकलों तक ही सीमित नजर आती हैं।
