व्यापारियों के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2 हजार रुपए से अधिक के व्यक्ति से व्यापारी को किए जाने वाले UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाए जाने की बात कही जा रही है। वहीं 75 हजार रुपए या उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपए तक हो सकता है। व्यापारियों का तर्क है कि थोक कारोबार में बड़ी रकम के भुगतान नियमित रूप से होते हैं। ऐसे में प्रत्येक लेनदेन पर शुल्क लगने से कारोबार की लागत बढ़ने की आशंका है।
भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू के मुताबिक UPI भुगतान व्यापारियों और आम लोगों के लिए तेज सरल और सुविधाजनक माध्यम बन चुका है। व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में लगातार सहयोग किया है। ऐसे में UPI पर MDR चार्ज लागू होने से छोटे और मध्यम व्यापारियों की लागत बढ़ सकती है। उनका कहना है कि सरकार को कारोबारियों की व्यावहारिक परेशानियों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित शुल्क पर पुनर्विचार करना चाहिए।
नो UPI डे के तहत व्यापारियों से अपील की गई है कि वे 8 अक्टूबर को 2 हजार रुपए से ज्यादा के UPI भुगतान स्वीकार न करें। इसे किसी तरह के टकराव के बजाय शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का माध्यम बताया गया है। दाल और चावल कारोबार से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर व्यापारियों ने हमेशा सकारात्मक सहयोग किया है और डिजिटल इंडिया अभियान में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
चावल-दाल व्यापारी संघ के अध्यक्ष महेश रामरख्यानी और सचिव सचिन संगतानी ने भी MDR से जुड़ी व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग रखी है। उनका कहना है कि व्यापारियों ने डिजिटल लेनदेन को अपनाकर भुगतान व्यवस्था को आसान बनाने में सहयोग दिया है। अब सरकार से उम्मीद है कि नए शुल्क का फैसला लेते समय व्यापारियों की लागत और बाजार की वास्तविक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाएगा।
व्यापारियों का कहना है कि बड़े मूल्य के डिजिटल लेनदेन में मामूली प्रतिशत शुल्क भी लगातार कारोबार करने वालों के लिए महत्वपूर्ण राशि बन सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि एक कारोबारी दिन में 2 हजार रुपए से अधिक के कई UPI लेनदेन करता है तो प्रस्तावित शुल्क का कुल प्रभाव बढ़ सकता है। इसी वजह से व्यापारी संगठन सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करना चाहते हैं।
भोपाल में आज होने वाला नो UPI डे इसी विरोध का सांकेतिक रूप है। व्यापारियों की कोशिश है कि एक दिन के इस प्रदर्शन के जरिए सरकार तक अपनी मांग पहुंचाई जाए और प्रस्तावित MDR चार्ज पर दोबारा विचार किया जाए। अब देखना होगा कि इस सांकेतिक विरोध के बाद सरकार और संबंधित पक्ष इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।
