जानकारी के मुताबिक आग की शुरुआत खेड़ापति हनुमान मंदिर के पीछे स्थित बालाजी छोले भटूरे की दुकान से हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर में भटूरे बनाते समय भट्ठी से आग भड़की और देखते ही देखते लपटें ऊपर लगे बैनर और फ्लैक्स तक पहुंच गईं। दुकान के अंदर फर्नीचर और पर्दे होने के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। करीब 25 फीट ऊंची लपटों ने आसपास की पांच से छह दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। घटना के समय दुकान में लगभग 50 से 60 लोग मौजूद थे। आग लगते ही लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और सभी अपनी जान बचाने के लिए बाहर निकलने लगे।
प्रत्यक्षदर्शियों ने दुकान में दो से तीन गैस सिलेंडर रखे होने और धमाकों की आवाज सुनाई देने की बात कही है। हालांकि नगर निगम के फायर अधिकारी सौरभ पटेल ने सिलेंडर रखे होने की पुष्टि की लेकिन उनके फटने की पुष्टि नहीं की। आग से दुकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। आसपास की दुकानों में दिवाली के लिए बड़ी मात्रा में सामान रखा था जो आग की भेंट चढ़ गया। त्योहार से ठीक पहले हुए इस हादसे ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है।
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल दमकल की पहुंच और बाजार में अतिक्रमण को लेकर खड़ा हो गया है। व्यापारियों के अनुसार माता मंदिर फायर स्टेशन घटनास्थल से लगभग एक किलोमीटर दूर है लेकिन दमकल को मौके तक पहुंचने में करीब 25 से 30 मिनट लग गए। दुकानदारों का कहना है कि सूचना देने के बाद घटनास्थल की सही लोकेशन समझाने में भी समय लगा। इसके बाद संकरी सड़कों पर खड़ी रेहड़ियों और अन्य अतिक्रमण के कारण दमकल वाहनों को आगे बढ़ने में परेशानी हुई। पुलिस और अन्य टीमों को रास्ता खाली कराने के लिए मशक्कत करनी पड़ी।
न्यू मार्केट में लगभग 900 पंजीकृत दुकानें और करीब 400 रेहड़ियां होने की बात कही जाती है। भीड़भाड़ वाले हिस्सों में शाम के समय पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। व्यापार संरक्षण समिति के उपाध्यक्ष अजय देवनानी ने अतिक्रमण के कारण दमकल को देरी होने की बात कही और बाजार में अतिरिक्त अग्निशमन व्यवस्था की मांग उठाई। उन्होंने नो हॉकर्स जोन के नियमों का सख्ती से पालन कराने की जरूरत भी बताई।
हादसे ने बाजार में फायर सेफ्टी की तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस दुकान से आग शुरू हुई उसके संचालक के खिलाफ करीब आठ महीने पहले अतिक्रमण को लेकर एफआईआर दर्ज कराए जाने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार पहले भी नोटिस दिए गए थे और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई थी। ऐसे में सवाल है कि कार्रवाई के बावजूद अतिक्रमण दोबारा कैसे हो गया। अब जरूरी है कि बाजार में अग्निशमन वाहनों के लिए रास्ते स्थायी रूप से खुले रखे जाएं और दुकानों में सुरक्षा नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जाए।
