इजरायल के राष्ट्रपति की ओर से सम्मान देने की घोषणा कैप्टन मच्छार के स्वस्थ होने के बाद की जाएगी। भारत में इजरायली दूतावास ने इस फैसले की जानकारी साझा करते हुए कहा कि कैप्टन की बहादुरी और साहस ने एक बड़ी त्रासदी को टालने में मदद की। उनके पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना करते हुए इजरायल ने उनके योगदान के लिए आभार जताया है। यह सम्मान विमान में पैदा हुए गंभीर संकट के दौरान यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों के मद्देनजर दिया जा रहा है।
यह घटना 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड 1073 में हुई थी। आरोप है कि उड़ान के दौरान सह-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छार पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की। इस दौरान विमान की स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी। राजा कृष्णमूर्ति के बयान के मुताबिक, विमान महज 30 सेकंड में लगभग 16,000 फीट नीचे आ गया था। ऐसे हालात में कैप्टन मच्छार गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद विमान और उसमें सवार लोगों की सुरक्षा के लिए प्रयास करते रहे।
गंभीर चोटों के बावजूद कैप्टन मच्छार किसी तरह कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचे और उसे खोलने में सफल रहे। इससे विमान में मौजूद यात्रियों और चालक दल के अन्य सदस्यों को कॉकपिट के भीतर पहुंचने तथा कथित हमलावर को काबू करने का अवसर मिला। इस कार्रवाई ने संकट के दौरान स्थिति संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कैप्टन की कोशिशों के बाद विमान में मौजूद फ्लाईदुबई के दो रिजर्व पायलटों ने नियंत्रण संभाला और उड़ान को सुरक्षित रूप से सऊदी अरब के तबूक में उतारा।
विमान में कुल 172 यात्री सवार थे। इनमें चार अमेरिकी नागरिक और 27 बच्चे भी शामिल थे। घटना के दौरान यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा पैदा हो गया था। इसके बावजूद विमान को सुरक्षित उतारने में सफलता मिली। कैप्टन मच्छार के साहस और संकट के समय लिए गए फैसलों को इसी वजह से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस घटना में उनकी भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है।
भारतीय नागरिक कैप्टन स्मित मच्छार के पास विमान संचालन का 17 वर्षों का अनुभव है। इसमें 11 वर्ष कप्तान के रूप में काम करने का अनुभव शामिल है। राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि जानलेवा हमले का सामना करने के बावजूद कैप्टन ने विमान में सवार लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। उनके मुताबिक, गंभीर रूप से घायल होने की स्थिति में भी कैप्टन को यह अहसास था कि विमान में मौजूद लोगों की जिंदगी उनके अगले कदम पर निर्भर हो सकती है। अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने खतरे को समझा और कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचने का साहसिक फैसला किया।
कृष्णमूर्ति ने अमेरिकी कांग्रेस के आधिकारिक रिकॉर्ड में कैप्टन मच्छार के साहस की सराहना दर्ज कराने की घोषणा की है। उन्होंने अन्य सांसदों से भी इस बहादुरी को सम्मानित करने की अपील की। उनका कहना है कि कैप्टन की सूझबूझ, दृढ़ निश्चय और साहस ने यात्रियों तथा चालक दल को हमले को रोकने और संभावित बड़े हादसे से बचने का अवसर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि विमान में मौजूद प्रत्येक व्यक्ति के पीछे एक परिवार है और कैप्टन के प्रयासों से अनेक परिवारों को अपूरणीय दुख से बचने का अवसर मिला।
