कांग्रेस की मांग है कि सार्वजनिक जमीन के आवंटन से संबंधित सभी दस्तावेज और नियम सार्वजनिक किए जाएं। पार्टी जानना चाहती है कि राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए कितनी राशि निर्धारित की गई थी और भुगतान किन शर्तों के तहत लिया गया। वहीं भाजपा के सेवा संकल्प अभियान के तहत 7 अक्टूबर को विजय नगर में आयोजित कार्यक्रम के लिए मैदान किस आधार पर आवंटित किया गया और इसके बदले कोई शुल्क लिया गया या नहीं। कांग्रेस का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग में पारदर्शिता होनी चाहिए और राजनीतिक आयोजनों के लिए समान नियम लागू होने चाहिए। हालांकि भाजपा को जमीन मुफ्त दिए जाने और नियमों की अनदेखी के आरोपों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
मैदान आवंटन को लेकर विवाद के बीच पिपल्याराव स्थित रीजनल पार्क के सामने भारत जोड़ो मैदान पर प्रस्तावित थोक पटाखा बाजार का मामला भी उठाया गया है। यहां करीब 40 दिनों तक चलने वाले बाजार के लिए 41 अस्थायी दुकानें बनाई जा रही हैं। बाजार में जनरेटर रूम लाइट टावर और पार्किंग जैसी व्यवस्थाएं भी प्रस्तावित हैं। जानकारी के मुताबिक दुकानों का निर्माण शुरू हो चुका है लेकिन IDA की ओर से किराये की अंतिम राशि तय किए जाने और आधिकारिक डिमांड नोट जारी होने की जानकारी सामने नहीं आई है। इस बीच बाजार के लिए पांच से सात लाख रुपये किराया होने की चर्चा है।
पटाखा व्यापारी एसोसिएशन ने प्रत्येक दुकान लगाने वाले व्यापारी से एक लाख रुपये जुटाने को कहा है। इसमें दुकान निर्माण मैदान का किराया बिजली सुरक्षा और अन्य खर्च शामिल बताए जा रहे हैं। कांग्रेस ने इसी मुद्दे को उठाते हुए पूछा है कि जब कुछ दिनों के राजनीतिक आयोजन के लिए 14 लाख रुपये से अधिक शुल्क लिया गया तो लगभग 40 दिन तक चलने वाले व्यावसायिक बाजार का किराया किस आधार पर निर्धारित होगा। पार्टी ने पिछले साल और इस साल के पटाखा बाजार के आवंटन शुल्क और खर्च का विवरण भी सार्वजनिक करने की मांग की है।
कांग्रेस का कहना है कि यदि अलग-अलग आयोजनों के लिए शुल्क निर्धारण में अंतर है तो IDA को उसका स्पष्ट आधार बताना चाहिए। पार्टी ने आशंका जताई है कि आवंटन प्रक्रिया में अनियमितता होने पर प्राधिकरण को राजस्व का नुकसान हो सकता है। फिलहाल इस पूरे मामले में IDA का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही शुल्क निर्धारण और आवंटन की शर्तों को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी। कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद अब प्राधिकरण के जवाब पर नजर रहेगी क्योंकि यह विवाद सार्वजनिक जमीन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और समान नियम लागू करने के सवाल से जुड़ा है।
