जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयुष चिकित्सा पद्धति की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर कैंडल मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें प्रशिक्षण के दौरान फिलहाल 9,383 रुपए मासिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है जो मौजूदा समय में उनके खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। वे इसे बढ़ाकर एमबीबीएस छात्रों के बराबर 21,500 रुपए करने की मांग कर रहे हैं। अपनी मांग को लेकर विद्यार्थियों ने शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज से झंडा चौक तक कैंडल मार्च निकाला। इस प्रदर्शन में करीब 150 से 200 छात्र शामिल हुए। झंडा चौक पहुंचकर विद्यार्थियों ने मानव श्रृंखला बनाई और स्टाइपेंड में वृद्धि की मांग को लेकर अपनी आवाज उठाई।
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि आयुष और एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति की पढ़ाई करने वाले छात्रों के स्टाइपेंड में अंतर नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक दोनों ही क्षेत्रों के विद्यार्थी प्रशिक्षण के दौरान मेहनत करते हैं और चिकित्सा सेवाओं से जुड़ी जिम्मेदारियों को समझते हुए अपना अनुभव बढ़ाते हैं। ऐसे में प्रशिक्षण के दौरान मिलने वाली आर्थिक सहायता में समानता होनी चाहिए। विद्यार्थियों ने समान काम के लिए समान आर्थिक लाभ की मांग उठाते हुए कहा कि मौजूदा स्टाइपेंड से पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्चों का प्रबंधन करना मुश्किल हो रहा है।
छात्रों के मुताबिक महंगाई के कारण भोजन आवास और अन्य जरूरी जरूरतों पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में 9,383 रुपए की मासिक राशि में सभी आवश्यक खर्चों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण बन गया है। उनका मानना है कि स्टाइपेंड बढ़ने से उन्हें आर्थिक राहत मिलेगी और वे अपनी पढ़ाई तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। विद्यार्थियों का कहना है कि चिकित्सा शिक्षा के दौरान आर्थिक दबाव कम होना जरूरी है ताकि वे अपनी शैक्षणिक जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभा सकें।
कैंडल मार्च के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी का सहयोग भी मिला है। विद्यार्थियों के अनुसार आयुष मंत्रालय के स्तर पर भी स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर बातचीत की गई है। इसके बावजूद अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। छात्रों का कहना है कि वे लंबे समय से इस मांग को उठा रहे हैं लेकिन निर्णय नहीं होने के कारण उन्हें विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
विद्यार्थियों ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि स्टाइपेंड बढ़ाने के मुद्दे पर जल्द निर्णय लिया जाए। उनका कहना है कि प्रशिक्षण के दौरान मिलने वाली आर्थिक सहायता उनकी जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए। विद्यार्थियों को उम्मीद है कि उनकी मांग पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और जल्द कोई सकारात्मक निर्णय सामने आएगा।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। फिलहाल उनकी प्रमुख मांग वर्तमान 9,383 रुपए के स्टाइपेंड को बढ़ाकर 21,500 रुपए करना है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग विद्यार्थियों की मांग पर क्या निर्णय लेता है और स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को लेकर कोई आधिकारिक आदेश कब तक जारी होता है।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। फिलहाल उनकी प्रमुख मांग वर्तमान 9,383 रुपए के स्टाइपेंड को बढ़ाकर 21,500 रुपए करना है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग विद्यार्थियों की मांग पर क्या निर्णय लेता है और स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को लेकर कोई आधिकारिक आदेश कब तक जारी होता है।
