नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर निशाना साधा है। नरसिंहपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने उन्हें भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा था। मुख्यमंत्री ने इस पुराने राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कांग्रेस को अपने इतिहास पर नजर डालने की नसीहत दी। उनके बयान के बाद SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस जब चुनाव में सफलता हासिल करती है तो उसे चुनावी प्रक्रिया में कोई खामी नजर नहीं आती लेकिन जब परिणाम उसके पक्ष में नहीं आते तो वह चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने लगती है। उन्होंने केरल और हिमाचल प्रदेश का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस अलग-अलग परिस्थितियों में अलग रुख अपनाती है। मुख्यमंत्री के मुताबिक चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने से पहले राजनीतिक दलों को अपने पुराने फैसलों और व्यवहार पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के खिलाफ लगाए जाने वाले गंभीर आरोपों के लिए ठोस तथ्यों और प्रमाणों की जरूरत पर भी जोर दिया।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने टीएन शेषन और लालकृष्ण आडवाणी के बीच हुए चुनाव का जिक्र किया। दरअसल पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन ने 1999 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर गुजरात की गांधीनगर सीट से चुनाव लड़ा था। इस सीट पर उनका मुकाबला भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से हुआ था। मुख्यमंत्री ने इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर कांग्रेस के मौजूदा रुख पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करने वाली पार्टी को अपने पुराने राजनीतिक निर्णयों को भी याद रखना चाहिए।
मोहन यादव ने अपने भाषण में पूर्व आईपीएस अधिकारी केपीएस गिल का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने राजनीतिक हितों के लिए अधिकारियों और संवैधानिक पदों से जुड़े लोगों को राजनीति में अवसर दिए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने नेहरू-गांधी परिवार पर परिवारवाद को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश की करीब 600 रियासतों ने अपने अधिकार सौंपे थे लेकिन उनके मुताबिक कांग्रेस ने राजनीतिक नेतृत्व को एक परिवार तक सीमित रखने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया। ये आरोप मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक संबोधन के दौरान लगाए।
गौरतलब है कि कांग्रेस SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी कर रही है। इसी मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस के विरोध को उसके राजनीतिक रुख से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर SIR को लेकर कांग्रेस की आपत्तियां चुनावी मतदाता सूची की प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता से संबंधित हैं।
नरसिंहपुर में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। इस दौरान उन्होंने संदीपनी एक्सीलेंस स्कूल के नए भवन का उद्घाटन किया और विद्यार्थियों के लिए बस सेवा को हरी झंडी दिखाई। कार्यक्रम में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लाभार्थियों के खातों में राशि हस्तांतरित करने और विकास परियोजनाओं से जुड़े कार्यक्रम भी शामिल रहे। इस तरह शिक्षा और विकास कार्यों के बीच मुख्यमंत्री ने SIR विवाद को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर चल रही बहस में पार्टी के पुराने राजनीतिक इतिहास का हवाला दिया।
