ऐसे में कारोबारियों को मंगलवार के सत्र में जल्दबाजी के बजाय सोच समझकर फैसले लेने की जरूरत होगी। सोमवार को भारतीय बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला। सेंसेक्स करीब 0.76 प्रतिशत गिरकर 71 हजार 924 अंक के आसपास बंद हुआ जबकि निफ्टी 50 में भी लगभग 0.7 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई और यह 22 हजार 400 के स्तर से नीचे चला गया। बाजार में गिरावट के पीछे कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता और वैश्विक परिस्थितियों से जुड़ी अनिश्चितता प्रमुख कारण रहे। निवेशक महंगाई के आंकड़ों और ब्याज दरों की आगे की दिशा को लेकर भी सतर्क हैं।
मंगलवार को बाजार की चाल तय करने वाले प्रमुख कारकों में कच्चे तेल की कीमतें शामिल रहेंगी। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है इसलिए तेल महंगा होने पर कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और महंगाई पर दबाव आ सकता है। इसके उलट कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बाजार के लिए राहत का संकेत बन सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी खबरों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।
विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की गतिविधियां भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। हाल के सत्रों में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की धारणा पर दबाव बनाया है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से कुछ सहारा मिल रहा है। यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है तो तेजी टिकने में मुश्किल हो सकती है। इसके विपरीत खरीदारी बढ़ने पर बाजार को समर्थन मिल सकता है।
इस सप्ताह निवेशकों की निगाह महंगाई के आंकड़ों और कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजों पर भी रहेगी। इन आंकड़ों से अर्थव्यवस्था की स्थिति और कंपनियों के प्रदर्शन को समझने में मदद मिलेगी। मजबूत नतीजे चुनिंदा शेयरों में खरीदारी बढ़ा सकते हैं जबकि कमजोर प्रदर्शन वाले शेयरों पर दबाव आ सकता है। अमेरिकी बाजारों की दिशा डॉलर और रुपये की चाल तथा वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बदलाव भी भारतीय बाजार को प्रभावित कर सकते हैं।
निवेशकों के लिए मंगलवार को सबसे जरूरी बात बाजार के शुरुआती रुख को देखकर तुरंत फैसला नहीं करना है। शुरुआती तेजी के बाद बिकवाली या गिरावट के बाद खरीदारी दोनों स्थितियों में बाजार की मजबूती की पुष्टि देखना जरूरी होगा। केवल अफवाह या सोशल मीडिया पर चल रही किसी खबर के आधार पर शेयर खरीदने से बचना चाहिए। किसी शेयर में निवेश से पहले कंपनी के नतीजे कारोबार की स्थिति और जोखिम का आकलन करना बेहतर होगा।
कुल मिलाकर 13 अक्टूबर को शेयर बाजार में सतर्क कारोबार रहने की संभावना है। कच्चे तेल में राहत विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और महंगाई से जुड़े संकेत बाजार को दिशा दे सकते हैं। हालांकि बाजार की वास्तविक चाल कारोबारी सत्र के दौरान सामने आने वाले आंकड़ों और खबरों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि बाजार का अनुमान निश्चित परिणाम नहीं होता इसलिए अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि के अनुसार ही फैसला लें।
