मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बैठक के बाद बताया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के साथ ओबीसी आरक्षण के मामले पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि चर्चा में उच्च न्यायालय के फैसले से संबंधित कानूनी पहलुओं के साथ आगामी कानूनी कार्रवाई की रणनीति पर भी बात हुई। सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाएगी, इसे लेकर अब कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।
इस बीच, मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सॉलिसिटर जनरल से बातचीत कर हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगवाना चाहते हैं, लेकिन इस उद्देश्य से दिल्ली जाने की जरूरत पर उन्होंने सवाल किया। सिंघार के मुताबिक, राज्य सरकार के पास विधानसभा के माध्यम से भी इस विषय पर कदम उठाने का विकल्प है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि जब विधानसभा मौजूद है, तो ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर विशेष सत्र क्यों नहीं बुलाया जा रहा है।
उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए जाने के पक्ष में है और इसके लिए तैयार है। उन्होंने राज्य सरकार से ओबीसी आरक्षण के संबंध में अध्यादेश जारी करने तथा कानून पारित कराने की मांग की। सिंघार ने सवाल उठाया कि सरकार ऐसा करने से क्यों बच रही है और बार-बार मामले को अदालत के निर्णय पर क्यों छोड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ओबीसी वर्ग को फिर से झूठे सपने दिखा रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि सरकार की नीयत स्पष्ट है, तो उसे तत्काल विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर ओबीसी आरक्षण की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उनके बयान के अनुसार, विधानसभा में इस विषय पर चर्चा और जरूरी कदम उठाने से सरकार की स्थिति सामने आ सकती है। हालांकि, विशेष सत्र बुलाने या अध्यादेश जारी करने को लेकर सरकार की ओर से किसी नए फैसले की जानकारी खबर में नहीं दी गई है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार की अगली कानूनी कार्रवाई को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। मुख्यमंत्री की सॉलिसिटर जनरल से मुलाकात के दौरान कानूनी पहलुओं और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की तारीख या इस संबंध में किसी औपचारिक निर्णय की घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि राज्य सरकार इस मामले को आगे किस कानूनी प्रक्रिया के तहत ले जाएगी।
ओबीसी आरक्षण को 27 प्रतिशत किए जाने का मामला अब राज्य सरकार की अगली कार्रवाई और विपक्ष की मांगों के बीच केंद्र में है। यदि सरकार इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाती है, तो उसे आरक्षण बढ़ाने के समर्थन में अपना कानूनी आधार प्रस्तुत करना होगा। फिलहाल, मुख्यमंत्री की कानूनी सलाह-मशविरा संबंधी पहल और उमंग सिंघार की विशेष सत्र बुलाने की मांग इस मुद्दे पर सामने आए प्रमुख घटनाक्रम हैं।
