भोपाल। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में किसानों की उपज की तौल में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। लुकवासा कृषि उपज मंडी के बाहर चना बेचने पहुंचे किसान कैलाश जाटव ने व्यापारी पर कम तौल करने का आरोप लगाया है। किसान के मुताबिक व्यापारी दीपक अहिरवार ने मंडी के भीतर मिलने वाले भाव से 50 रुपए प्रति क्विंटल अधिक कीमत देने का भरोसा दिलाया था। इसी लालच में किसान अपनी उपज लेकर मंडी के बाहर पहुंचा। आरोप है कि तौल के दौरान करीब 11 क्विंटल चने को केवल 8 क्विंटल बताया गया। किसान ने दोबारा तौल कराने की मांग की तो करीब तीन क्विंटल का अंतर सामने आया।
किसान कैलाश जाटव के अनुसार अधिक भाव मिलने की उम्मीद में वह व्यापारी के पास चना बेचने पहुंचा था। शुरुआत में तौल के दौरान जितनी उपज बताई गई उस पर उसे संदेह हुआ। इसके बाद उसने दोबारा तौल कराने का फैसला किया। दोबारा तौल में कथित गड़बड़ी सामने आने पर मामला गंभीर हो गया। किसान का आरोप है कि यदि वह समय रहते तौल की जांच नहीं कराता तो उसे अपनी उपज का उचित भुगतान नहीं मिल पाता और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता।
बताया गया है कि करीब 11 क्विंटल चने को 8 क्विंटल बताए जाने से लगभग तीन क्विंटल का अंतर सामने आया। किसान के अनुसार इस गड़बड़ी के कारण उसे करीब 20 हजार रुपए तक का नुकसान हो सकता था। हालांकि वास्तविक नुकसान का आकलन उपज की सही मात्रा और उस समय लागू बाजार भाव के आधार पर किया जा सकेगा। फिलहाल किसान की शिकायत के बाद मामले ने मंडी में तौल व्यवस्था और किसानों को मिलने वाले भुगतान पर सवाल खड़े किए हैं।
घटना सामने आने के बाद कृषि उपज मंडी प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। मंडी सचिव नरेश जाटव ने बताया कि शिकायत की जांच की जा रही है। यदि तौल में अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय की जाएगी।
वहीं कोलारस के एसडीएम शिवदयाल धाकड़ ने व्यापारी का कांटा जब्त करने और जुर्माना लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही भविष्य में किसानों को इस तरह की परेशानी से बचाने के लिए मंडी क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले सभी कांटों की जांच कराने की बात कही गई है। तौल उपकरणों की जांच से यह सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है कि किसानों की उपज का वजन सही दर्ज हो और उन्हें भुगतान में नुकसान न उठाना पड़े।
कृषि उपज मंडियों में किसान अपनी मेहनत से तैयार की गई फसल बेचने आते हैं। ऐसे में तौल और भुगतान में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। थोड़ी सी गड़बड़ी भी किसान की कमाई पर सीधा असर डाल सकती है। लुकवासा मंडी के बाहर सामने आया यह मामला किसानों के लिए सतर्क रहने और उपज की तौल स्वयं जांचने की जरूरत को रेखांकित करता है। प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई से स्पष्ट होगा कि इस मामले में कितनी अनियमितता हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
