निकम ने बताया कि कसाब ने अदालत में कहा था कि वह मुंबई आया जरूर था, लेकिन लोगों की हत्या उसने नहीं की। उसके अनुसार, उसके साथ मौजूद अबू इस्माइल ने हत्याएं की थीं। उसने बॉलीवुड फिल्मों के प्रति अपने शौक को भी मुंबई आने की वजह बताया। निकम ने कसाब की इस दलील को स्वीकार नहीं किया और उसके खिलाफ उपलब्ध सबूत अदालत में पेश करने का निर्णय लिया। उनका कहना था कि आरोपी अपनी पूरी भूमिका स्वीकार नहीं कर रहा था और केवल अपने बयान के आधार पर उसे जिम्मेदारी से बचने नहीं दिया जा सकता था।
कसाब से जुड़ा यह दावा पहले भी चर्चा में आया था। निकम ने एक अन्य कार्यक्रम में बताया था कि कसाब ने हिंदी फिल्मों का प्रशंसक होने और अमिताभ बच्चन के घर जाने की इच्छा का भी उल्लेख किया था। हालांकि, मुकदमे के दौरान उसके खिलाफ पेश किए गए सबूतों और घटनाओं के क्रम ने मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
निकम ने 26/11 हमले के दौरान ताज महल पैलेस होटल में आतंकवादियों और उनके हैंडलर्स के बीच हुई बातचीत का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, फोन पर हुई बातचीत को पकड़े जाने से जांचकर्ताओं को हमले के दौरान आतंकवादियों की गतिविधियों और उन्हें दिए जा रहे निर्देशों को समझने में मदद मिली। इस बातचीत को अभियोजन पक्ष ने सबूत के रूप में इस्तेमाल किया था।
उन्होंने होटल में बंधक बनाए गए लोगों से जुड़ी एक घटना का उदाहरण दिया। निकम के मुताबिक, आतंकवादियों ने अपने हैंडलर्स को बताया था कि उनके कब्जे में तीन लोग हैं। इनमें एक क्लर्क, एक वेटर और एक शिक्षक बताया गया था। इसके बाद हैंडलर ने कथित शिक्षक से उसके स्कूल के बारे में पूछताछ करने और बंधकों के कपड़े उतरवाकर उन्हें केवल अंडरवियर में रखने का निर्देश दिया।
निकम ने बताया कि हैंडलर को उस व्यक्ति के शिक्षक होने के दावे पर संदेह था। उसने हमलावर को उससे पूछताछ करने और मारपीट करने के लिए कहा। इसके बाद बंधक व्यक्ति ने अपनी वास्तविक पहचान बैंक के चेयरमैन के रूप में बताई। निकम के अनुसार, बाद में उन्होंने उस बैंक चेयरमैन का बयान दर्ज किया, लेकिन अदालत में गवाही देने के समय वह काफी डरे हुए थे।
निकम ने बताया कि गवाह को भरोसा दिलाया गया कि उसके बयान के समर्थन में आतंकवादियों और उनके हैंडलर्स के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग मौजूद है। उन्होंने गवाही देने की जरूरत पर जोर दिया, क्योंकि संबंधित व्यक्ति ने कोई गलत काम नहीं किया था और उसकी गवाही मामले में महत्वपूर्ण हो सकती थी।
इसी कानूनी लड़ाई और निकम के पेशेवर जीवन को फिल्म ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ में दिखाया गया है। फिल्म में राजकुमार राव ने उज्ज्वल निकम की भूमिका निभाई है, जबकि ललित प्रभाकर अजमल कसाब के किरदार में हैं। अविनाश अरुण ने फिल्म का निर्देशन किया है और वामिका गब्बी निकम की पत्नी ज्योति की भूमिका निभा रही हैं। फिल्म में उस मुकदमे और कानूनी संघर्ष को प्रस्तुत किया गया है, जिसने निकम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
नवंबर 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमलों में 166 लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। कसाब इस हमले में पकड़ा गया एकमात्र जीवित आतंकवादी था। मुकदमे में दोषी ठहराए जाने के बाद उसे मौत की सजा सुनाई गई, जिसे वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा। यह मामला भारत के सबसे चर्चित आपराधिक मुकदमों में शामिल रहा है।
