इलेक्ट्रिक वाहनों और नई तकनीक पर निवेशकों की नजर
तीसरी तिमाही में इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ता रुझान निवेश का प्रमुख विषय बना रहा। निवेशकों ने इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं के साथ बैटरी तकनीक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मोबिलिटी प्लेटफॉर्म और ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियों में पूंजी लगाई। रिपोर्ट के अनुसार निवेशक ऐसी कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं जिनका कारोबार बड़े स्तर पर विस्तार कर सकता है और जिनके पास दूसरों से अलग तकनीक या मजबूत कारोबारी मॉडल है। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संभावनाओं और परिवहन व्यवस्था में हो रहे बदलावों ने इन क्षेत्रों को निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण बना दिया है। अब निवेश केवल कार और दोपहिया वाहन बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं है बल्कि उन व्यवसायों पर भी ध्यान दिया जा रहा है जो इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के पूरे ढांचे को मजबूत करते हैं।
एमएंडए और निजी निवेश के तहत 808 मिलियन डॉलर के सौदे
रिपोर्ट के मुताबिक तीसरी तिमाही में विलय एवं अधिग्रहण तथा निजी इक्विटी और वेंचर कैपिटल गतिविधियों के तहत कुल 808 मिलियन डॉलर के 28 सौदे हुए। वहीं केवल एमएंडए गतिविधियों के अंतर्गत 389 मिलियन डॉलर के 12 सौदे दर्ज किए गए। पिछली तिमाही में एमएंडए के तहत 138 मिलियन डॉलर के पांच सौदे हुए थे। इससे पता चलता है कि कंपनियां अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ाने और कारोबार का विस्तार करने के लिए अधिग्रहण तथा रणनीतिक साझेदारी जैसे विकल्पों पर जोर दे रही हैं। निवेशकों का रुझान उन कारोबारों की ओर है जो भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की जरूरतों को पूरा कर सकें।
घरेलू सौदों की रही बड़ी हिस्सेदारी
तीसरी तिमाही में घरेलू सौदे निवेश गतिविधियों के प्रमुख चालक बने रहे। कुल सौदों की संख्या में इनकी हिस्सेदारी 75 प्रतिशत रही जबकि कुल सौदा मूल्य में घरेलू सौदों का योगदान 87 प्रतिशत दर्ज किया गया। रणनीतिक निवेश मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं मोबिलिटी प्लेटफॉर्म ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी कंपनियों और ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों में केंद्रित रहा। यह रुझान बताता है कि कंपनियां नई क्षमताएं हासिल करने और मोबिलिटी इकोसिस्टम में अपनी स्थिति मजबूत करने पर ध्यान दे रही हैं।
ऑटो सेक्टर में निवेश के नए चक्र के संकेत
ग्रांट थॉर्नटन भारत में ऑटोमोटिव एवं ईवी इंडस्ट्री के लीडर और पार्टनर साकेत मेहरा के अनुसार ऑटोमोबाइल सेक्टर निवेश के एक नए चक्र में प्रवेश कर रहा है। यह बदलाव मोबिलिटी क्षेत्र में हो रहे व्यापक परिवर्तन से प्रेरित है। अब पूंजी वाहन निर्माताओं के अलावा बैटरी तकनीक चार्जिंग नेटवर्क ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी और मोबिलिटी प्लेटफॉर्म जैसे क्षेत्रों में भी पहुंच रही है। निवेशक ऐसी कंपनियों को समर्थन देना चाहते हैं जो भारत में परिवहन के भविष्य के लिए जरूरी तकनीक और बुनियादी ढांचा विकसित कर रही हैं। तीसरी तिमाही के आंकड़े दर्शाते हैं कि निवेशक फंडिंग के मामले में चुनिंदा कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करने के बावजूद भारत के मोबिलिटी और इलेक्ट्रिफिकेशन क्षेत्र की दीर्घकालिक संभावनाओं को लेकर भरोसा बनाए हुए हैं।
