नई दिल्ली । स्मार्टफोन की दुनिया में फोल्डेबल फोन तेजी से अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत है कि इन्हें किताब की तरह खोला और बंद किया जा सकता है। सामान्य स्मार्टफोन में स्क्रीन पर अधिक दबाव पड़ने या फोन गिरने से कांच टूटने का खतरा रहता है, लेकिन फोल्डेबल फोन की स्क्रीन को खास तरीके से तैयार किया जाता है, ताकि वह बार-बार मुड़ने के बावजूद काम करती रहे। यही वजह है कि इनकी बनावट और तकनीक सामान्य स्मार्टफोन से काफी अलग होती है। हालांकि, इनकी स्क्रीन भी पूरी तरह टूटने से सुरक्षित नहीं होती।
फोल्डेबल फोन की स्क्रीन के लचीलेपन के पीछे कई तकनीकों का योगदान होता है। इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री, स्क्रीन की अलग-अलग परतें और फोन को मोड़ने वाला हिंज मिलकर काम करते हैं। इन सभी हिस्सों को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि फोन खोलने और बंद करने के दौरान स्क्रीन पर पड़ने वाला दबाव नियंत्रित रहे।
सामान्य स्मार्टफोन की स्क्रीन में कठोर कांच का इस्तेमाल किया जाता है। यह रोजमर्रा के उपयोग में सुरक्षा देता है, लेकिन इसे मोड़ने की कोशिश करने पर टूटने का खतरा बढ़ जाता है। इसके विपरीत, फोल्डेबल फोन में लचीले डिस्प्ले का इस्तेमाल होता है। यह स्क्रीन को एक निश्चित सीमा तक मोड़ने की सुविधा देता है। इसकी बनावट ऐसी होती है कि मुड़ने के बाद भी डिस्प्ले तस्वीरें दिखाने और टच के जरिए निर्देश पहचानने का काम कर सके।
फोल्डेबल स्क्रीन केवल एक सामग्री से नहीं बनती, बल्कि इसमें कई पतली परतें होती हैं। इनमें तस्वीर दिखाने वाली डिस्प्ले परत, उंगलियों के स्पर्श को पहचानने वाली परत और बाहरी सतह को खरोंच से बचाने वाली सुरक्षा परत शामिल होती हैं। प्रत्येक परत का अलग काम होता है। इनका संयोजन इस तरह किया जाता है कि स्क्रीन के मुड़ने पर वे एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाए रखें और डिस्प्ले का काम प्रभावित न हो।
कुछ फोल्डेबल स्मार्टफोन में अल्ट्रा-थिन ग्लास यानी बेहद पतले विशेष कांच का इस्तेमाल किया जाता है। यह सामान्य मोटे कांच की तरह कठोर नहीं होता और डिजाइन के अनुसार मुड़ सकता है। इसके ऊपर सुरक्षा के लिए अतिरिक्त परत भी दी जा सकती है। इस तरह स्क्रीन की मजबूती किसी एक सामग्री पर निर्भर नहीं करती, बल्कि कई परतों और उनकी बनावट का संयुक्त परिणाम होती है।
स्क्रीन को सुरक्षित रखने में हिंज की भूमिका भी बेहद अहम है। हिंज वह यांत्रिक हिस्सा है, जिसकी मदद से फोन खुलता और बंद होता है। इसे दरवाजे के कब्जे की तरह समझा जा सकता है। फोल्डेबल फोन में हिंज का डिजाइन इस तरह तैयार किया जाता है कि स्क्रीन एक नियंत्रित दिशा और सीमा में मुड़े। इससे मोड़ वाले हिस्से पर पड़ने वाले तनाव को कम करने में मदद मिलती है। कुछ डिजाइन में फोन बंद होने पर स्क्रीन को अधिक घुमावदार आकार में मोड़ने की व्यवस्था होती है, जिससे किसी एक जगह पर अत्यधिक दबाव पड़ने की आशंका घट सकती है।
फोल्डेबल फोन की स्क्रीन की टिकाऊ क्षमता जांचने के लिए कंपनियां परीक्षण भी करती हैं। इनमें फोन को मशीनों की मदद से बार-बार खोलने और बंद करने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं। इन परीक्षणों से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि लगातार इस्तेमाल के दौरान स्क्रीन और हिंज किस तरह काम करते हैं। हालांकि, वास्तविक टिकाऊपन फोन के मॉडल, डिजाइन, सामग्री और इस्तेमाल की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
यह समझना जरूरी है कि फोल्डेबल स्क्रीन हमेशा के लिए खराबी से सुरक्षित नहीं रहती। फोन गिरने, तेज दबाव पड़ने, नुकीली वस्तु से खरोंच लगने या मुड़ने वाले हिस्से में धूल और छोटे कण पहुंचने से नुकसान हो सकता है। स्क्रीन के बीच दिखाई देने वाली हल्की लकीर को क्रीज कहा जाता है। यह मुड़ने वाले हिस्से पर बन सकती है और इसकी स्पष्टता अलग-अलग फोन में अलग हो सकती है।
इसलिए फोल्डेबल स्मार्टफोन की खासियत केवल उसकी मुड़ने वाली स्क्रीन नहीं, बल्कि लचीले डिस्प्ले, विशेष परतों और हिंज के बीच बेहतर तालमेल है। यही तकनीक इसे बार-बार खोलने और बंद करने योग्य बनाती है, लेकिन लंबे समय तक सही स्थिति में बनाए रखने के लिए सावधानी से इस्तेमाल करना भी जरूरी है।
