पाकिस्तान ने पिछले वर्ष तालिबान के साथ तनाव के बाद अफगानिस्तान से लगने वाली प्रमुख सीमा चौकियों को बंद कर दिया था। इनमें तोरखम, स्पिन बोल्डक, खरलाची, गुलाम खान और अंगूर अड्डा क्रॉसिंग शामिल हैं। पाकिस्तान की सरकार और सैन्य नेतृत्व को उम्मीद थी कि व्यापारिक आवाजाही रोकने से तालिबान पर दबाव बढ़ेगा और वह पाकिस्तान की शर्तें मानने के लिए तैयार होगा। हालांकि, सीमा बंद रहने से दोनों तरफ के व्यापारियों को नुकसान हुआ है।
जहांगीर खट्टक ने कहा कि सीमा बंद होने के एक वर्ष से अधिक समय बाद भी पाकिस्तान को अपेक्षित लाभ नहीं मिला है। उनके मुताबिक, सीमा के दोनों ओर कारोबार करने वाले कई व्यापारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले का प्रभाव केवल अफगानिस्तान के साथ होने वाले प्रत्यक्ष व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कारण पाकिस्तान के मध्य एशियाई बाजारों तक पहुंचने के अवसर भी प्रभावित हुए हैं।
पाकिस्तान की दवा इंडस्ट्री को इस स्थिति से खास नुकसान होने की बात कही गई है। इसके अलावा सीमेंट और कृषि उत्पादों के निर्यात पर भी असर पड़ा है। अफगानिस्तान के रास्ते मध्य एशिया तक पहुंचने वाले पाकिस्तानी कारोबारियों के लिए सीमा बंद होने से व्यापारिक मार्ग सीमित हो गए हैं। निर्यातकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और पाकिस्तान के लिए इन बाजारों में अपनी पहुंच बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
दोनों देशों के बीच व्यापार के आंकड़े भी गिरावट की ओर संकेत करते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में पाकिस्तान और अफगानिस्तान का द्विपक्षीय व्यापार करीब 1.3 अरब डॉलर से घटकर 358 मिलियन डॉलर रह गया। यह लगभग 74 प्रतिशत की गिरावट है। व्यापार में इस कमी से सीमा पार सामान भेजने वाले कारोबारियों और संबंधित उद्योगों पर दबाव बढ़ा है।
दूसरी ओर, तालिबान प्रशासन पाकिस्तान पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक रास्ते विकसित करने की कोशिश कर रहा है। अफगानिस्तान ने चीन के साथ वखान कॉरिडोर के जरिए संपर्क बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। इस मार्ग के माध्यम से चीन और मध्य एशियाई देशों के साथ सीधे व्यापार की संभावनाएं बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही अफगानिस्तान ने ईरान और तुर्की के रास्ते रेल परिवहन के जरिए कारोबार बढ़ाने के विकल्प भी अपनाए हैं। चीन के साथ व्यापारिक संपर्क बढ़ने से अफगानिस्तान को नए बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर मिला है।
जहांगीर खट्टक का मानना है कि सीमा बंद करने की नीति का सबसे बड़ा असर पाकिस्तान के उद्योगों पर पड़ा है। उनके अनुसार, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ व्यापार रोककर तालिबान पर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन इससे खुद उसके निर्यातकों और उद्योगों को नुकसान पहुंचा। वहीं, अफगानिस्तान दूसरे व्यापारिक मार्गों की तलाश में जुटा है।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच व्यापारिक संबंधों में आई गिरावट क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और सीमा पार कारोबार के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष सीमा संबंधी प्रतिबंधों और व्यापारिक मतभेदों को लेकर क्या कदम उठाते हैं।
