मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अक्टूबर महीने के वेतन का भुगतान नवंबर में किया जाएगा और इसी वेतन के साथ बढ़े हुए महंगाई भत्ते की राशि भी नकद दी जाएगी। सरकार ने पेंशनर्स के लिए भी महंगाई राहत में 2 प्रतिशत की वृद्धि करने का निर्णय लिया है। पेंशनर्स के लिए यह बढ़ोतरी जुलाई 2026 से लागू होगी। इससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी बढ़ती महंगाई के बीच आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
इस बढ़ोतरी के बाद मध्यप्रदेश के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो जाएगा। वहीं पेंशनर्स की महंगाई राहत में भी 2 प्रतिशत का इजाफा होगा। हालांकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में मध्यप्रदेश के कर्मचारी अभी भी पीछे रहेंगे। केंद्र सरकार ने 28 अक्टूबर को केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 63 प्रतिशत कर दिया था। इसके बाद मध्यप्रदेश में भी बढ़ोतरी की मांग तेज हो गई थी। राज्य सरकार के नए फैसले के बावजूद प्रदेश के कर्मचारी और अधिकारी केंद्रीय कर्मचारियों से 3 प्रतिशत कम महंगाई भत्ता प्राप्त करेंगे।
महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की मांग को लेकर पेंशनर्स संगठनों की ओर से भी लगातार आवाज उठाई जा रही थी। पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष आमोद सक्सेना ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य सचिव और वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर लंबित महंगाई राहत जारी करने की मांग की थी। एसोसिएशन ने 1 जनवरी 2026 से लंबित 2 प्रतिशत और 1 जुलाई 2026 से 3 प्रतिशत महंगाई राहत का भुगतान जल्द करने की मांग रखी थी। संगठन के मुताबिक कुल 5 प्रतिशत महंगाई राहत लंबित थी।
एसोसिएशन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी ने कहा कि महंगाई राहत पेंशनर्स के लिए बढ़ती कीमतों के असर को कम करने का महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा है। दवाइयों से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों तक लगातार बढ़ते खर्च के बीच पेंशनर्स को मिलने वाली राहत उनकी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद करती है।
सरकार के ताजा फैसले से कर्मचारियों और पेंशनर्स को कुछ आर्थिक राहत जरूर मिलेगी। अब कर्मचारियों की नजर एरियर की तीन किस्तों के भुगतान और बढ़े हुए भत्ते के वेतन में शामिल होने पर रहेगी। वहीं केंद्र और राज्य के महंगाई भत्ते के बीच बना अंतर भी कर्मचारियों के लिए आगे मांग का विषय बना रह सकता है।
