सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक एयरलाइन कंपनियों को अपने संचालन की लागत और अन्य व्यावसायिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किराया निर्धारित करना होगा। कंपनियों को किराए से जुड़ी जानकारी नागर विमानन महानिदेशालय यानी डीजीसीए को उपलब्ध करानी होगी। इसके साथ ही पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड करनी होगी। इसका उद्देश्य यात्रियों को टिकट की वास्तविक कीमत और उसमें शामिल अलग-अलग शुल्कों की स्पष्ट जानकारी देना है। नए प्रावधानों के तहत कंपनियों को टिकट के किराए का पूरा विवरण साझा करना होगा ताकि यात्रियों को बुकिंग के समय यह समझने में परेशानी न हो कि उनसे किस मद में कितना पैसा लिया जा रहा है।
नए नियमों के अनुसार एयरलाइंस को बेस किराया टैक्स फीस और अन्य शुल्कों की जानकारी स्पष्ट रूप से देनी होगी। इसके अलावा टिकट रद्द कराने पर लगने वाले चार्ज और रिफंड से संबंधित नियम भी यात्रियों के सामने रखने होंगे। इससे टिकट बुक करने से पहले यात्री अलग-अलग एयरलाइंस के किराए और उनकी शर्तों की तुलना कर सकेंगे। हालांकि किराया तय करने की अधिक स्वतंत्रता मिलने से कंपनियां मांग और उपलब्ध सीटों के आधार पर कीमतों में बदलाव कर सकती हैं। छुट्टियों के मौसम त्योहारों और अधिक यात्रियों की आवाजाही वाले दिनों में टिकट की कीमतों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि विशेष परिस्थितियों में जनहित को देखते हुए हस्तक्षेप का अधिकार उसके पास रहेगा। यानी यदि किसी असामान्य स्थिति में हवाई किराया यात्रियों के लिए अत्यधिक परेशानी का कारण बनता है तो सरकार आवश्यक निर्देश जारी कर सकती है। सामान्य परिस्थितियों में हालांकि एयरलाइंस को अपने व्यावसायिक फैसले लेने की छूट मिलेगी। इस बदलाव से विमानन कंपनियों को परिचालन लागत के अनुसार किराया तय करने में सुविधा मिलने की उम्मीद है। दूसरी तरफ यात्रियों के सामने यह चुनौती भी रहेगी कि वे टिकट बुक करते समय कीमतों की तुलना करें और यात्रा की योजना पहले से बनाएं।
इस बीच विमानन कंपनियों की लागत बढ़ने का दबाव भी लगातार बना हुआ है। रविवार से विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल एटीएफ की कीमत में 1.37 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में एटीएफ का भाव 137.12 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 138.50 रुपये प्रति लीटर हो गया है। विमान ईंधन की कीमतों में लगातार चौथे महीने बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे पहले अक्टूबर में 16 रुपये प्रति लीटर की बड़ी वृद्धि हुई थी जबकि सितंबर में 6.28 रुपये और अगस्त में 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी।
विमानन कंपनियों के कुल परिचालन खर्च में एटीएफ की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत होती है। ऐसे में ईंधन महंगा होने से कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। इसके अलावा 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक गैस सिलेंडर की कीमत में भी 10 रुपये की वृद्धि की गई है। अब आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई किराया व्यवस्था और बढ़ती परिचालन लागत का असर हवाई टिकटों की कीमतों पर कितना पड़ता है। यात्रियों के लिए सबसे अहम बात यह होगी कि उन्हें पारदर्शी किराया जानकारी के साथ प्रतिस्पर्धी कीमतों पर टिकट मिल पाते हैं या नहीं।
